राजस्थान सेवा नियम, खंड-II के परिशिष्ट-I के भाग-III
1. राजस्थान सेवा नियम के अन्तर्गत आकस्मिक अवकाश को अवकाश की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि उपरोक्त अवकाश के दौरान राज्य कर्मचारी द्वारा कर्तव्य वेतन आहरित किया जाता है।इसलिए, तकनीकी रूप से आकस्मिक अवकाश पर रहने वाले सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य से अनुपस्थित नहीं माना जाता है और उसका वेतन नहीं काटा जाता है।
हालाँकि, आकस्मिक अवकाश इस प्रकार नहीं दिया जाना चाहिए जिससे कि निम्नलिखित से संबंधित नियमों का उल्लंघन (बचाव) हो:-
(i) वेतन और भत्तों की गणना की तिथि
(ii) कार्यालय का प्रभार
(iii) अवकाश का प्रारंभ और समाप्ति (ग्रीष्मावकाश के अलावा हर प्रकार के अवकाश/राजपत्रित अवकाश के साथ आकस्मिक अवकाश देय है )
(iv) ड्यूटी पर वापसी
2. (क) इस पैरा के खंड (ख) में दिए गए प्रावधान के अलावा, सरकारी कर्मचारियों को स्वीकार्य आकस्मिक अवकाश की अधिकतम अवधि एक वर्ष [1 जनवरी से 31 दिसंबर] में 15 दिन होगी, जो किसी एक समय में 10 दिनों की सीमा के अधीन होगी।
अपवाद :- अवकाश कालीन विभाग के कर्मचारियों जैसे सरकारी महाविद्यालयों, विद्यालयों, पॉलिटेक्निक एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के संबंध में 'वर्ष' शब्द का अर्थ 1 जुलाई से प्रारंभ होकर 30 जून को समाप्त होने वाला वर्ष होगा। यह 01.07.1963 से प्रभावी होगा।
(ख) (i) पुलिस विभाग के उप-निरीक्षकों, सहायक उप-निरीक्षकों, हेड कांस्टेबलों और कांस्टेबलों को स्वीकार्य आकस्मिक अवकाश की अधिकतम अवधि 01.01.1979 से एक वर्ष में 25 दिन होगी, जो किसी एक समय में 10 दिनों की सीमा के अधीन होगी।
(ख) (ii) नागरिक सुरक्षा संगठन की अग्निशमन सेवाओं के कर्मचारियों को स्वीकार्य आकस्मिक अवकाश की अधिकतम अवधि 01.01.1980 से एक वर्ष में 25 दिन होगी, जो किसी एक समय में 10 दिनों की सीमा के अधीन होगी।
F.D. Order No. F. 1(34) FD (Gr-2)/75, dated 02.08.1975.
(ख) (iii)
(1) राजस्थान सेवा नियम (R.S.R.) खण्ड–II के परिशिष्ट–I के “Section III – Casual Leave” के अनुसार, सरकारी कर्मचारी को एक दिन या उससे अधिक अवधि के लिए आकस्मिक अवकाश लेने की अनुमति है, परंतु एक बार में अधिकतम 10 दिन तक ही अवकाश लिया जा सकता है
(2) यदि कोई सरकारी कर्मचारी आधे दिन के आकस्मिक अवकाश के लिए आवेदन करता है तो उसे आधे दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जा सकता है।
(3) पूर्वाह्न सत्र में 'आधा दिन' दोपहर के भोजन के समय तक की अवधि माना जाएगा और दोपहर में इसमें दोपहर के भोजन की अवधि शामिल होगी, अपरान्ह पूर्व सत्र के लिए यह समय 2.00 बजे तक मान्य होगा तथा अपरान्ह पश्चात् के लिए आकस्मिक अवकाश का समय 1.30 बजे प्रारम्भ होगा एवं प्रातः कालीन कार्य दिवस में विभाजन का समय प्रातः 10.00 बजे का मान्य किया जावेगा।
(4) ये आदेश शैक्षणिक संस्थानों में सेवा दे रहे सरकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे, चाहे वे शिक्षण पक्ष में हों या गैर-शिक्षण पक्ष में।
➽आकस्मिक अवकाश की पूर्व स्वीकृति
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या F. 1(44) FD (Exp-Rules)/64, दिनांक 22.5.1965
राजस्थान सेवा नियम, खंड II के परिशिष्ट I के भाग III के अनुसार आकस्मिक अवकाश पर रहने वाला व्यक्ति ड्यूटी पर ही माना जाता है इसलिए आकस्मिक अवकाश प्रदान करना पूर्णतः स्वीकृति प्रदान करने वाले प्राधिकारी के विवेक पर निर्भर करता है। इसलिए यह जरुरी नहीं है कि मांगा गया आकस्मिक अवकाश हमेशा स्वीकृत ही होगा। यदि स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी को लगता है कि राजकीय कार्य प्रभावित होगा, तो वह आकस्मिक अवकाश को अस्वीकार कर सकता है। जिस सरकारी कर्मचारी का आकस्मिक अवकाश का आवेदन अस्वीकृत कर दिया गया हो और जो ड्यूटी पर उपस्थित न हो, वह जानबूझकर ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का दोषी होगा। ऐसी जानबूझकर अनुपस्थिति सेवा में व्यवधान मानी जाती है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्व सेवाओं की जब्ती के साथ-साथ दुराचार भी माना जाएगा।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या F.1 (34) FD/Rules/70, दिनांक 30.06.1970
राजस्थान सेवा नियम, खंड-II के परिशिष्ट I के अनुभाग-III 'आकस्मिक अवकाश' में दिए गए 'स्पष्टीकरण' के अनुसार, एक सरकारी कर्मचारी को ऐसे अवकाश का उपभोग करने से पूर्व आकस्मिक अवकाश की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक है। परन्तु कभी-कभी सरकारी कर्मचारी को स्वयं की या अपने परिवार के सदस्यों अथवा रिश्तेदारों की बीमारी के कारण या अपने नियंत्रण से बाहर किसी कारण से आकस्मिक अवकाश की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने में वास्तविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अत: स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी ऐसे मामलों में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर ऐसे अवसरों जैसे बीमारी, अस्पताल में उपस्थिति, अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आकस्मिक अवकाश की कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान कर सकते हैं, भले ही कर्मचारी द्वारा इसके लिए पूर्व स्वीकृति प्राप्त न की गई हो।
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या F.1 (34) FD/Rules/70, दिनांक 19.10.1970
वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या F.1(44) FD (Exp-Rules)/64 दिनांक 22.05.1965 के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि जो सरकारी कर्मचारी आकस्मिक अवकाश की पूर्व स्वीकृति प्राप्त नहीं करता है और जिसका आकस्मिक अवकाश का आवेदन पत्र स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी द्वारा खारिज कर दिया जाता है तथा जो ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होता है, वह ड्यूटी से स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थिति का दोषी होगा। ऐसी स्वेच्छापूर्वक अनुपस्थिति सेवा में व्यवधान के समान है जिसमें पिछले सेवाकाल की जप्ती के साथ-साथ दुर्व्यवहार भी शामिल है। ज्ञापन संख्या F.1 (34) FD/Rules/70, दिनांक 30.06.1970 के माध्यम से अवकाश स्वीकृत करने वाले अधिकारियों से अनुरोध किया गया था कि वे वास्तविक प्रकृति के मामलों में (जहाँ आकस्मिक अवकाश की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करना संभव नहीं था) आकस्मिक अवकाश देने में सहानुभूतिपूर्वक दृष्टिकोण अपनाएँ।
ऊपर उल्लेखित दिनांक 30.06.1970 के वित्त विभाग के ज्ञापन में वर्णित परिस्थितियों को छोड़कर, दिनांक 22.05.1965 के वित्त विभाग के ज्ञापन संख्या F.1(44)FD(E-R)/64 के प्रावधानों को लागू करने के लिए, यह आवश्यक है कि स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी यह सुनिश्चित करें कि आकस्मिक अवकाश के आवेदनों को नियत तिथि से पहले अस्वीकार कर दिया जाए और ऐसी अस्वीकृति की सूचना संबंधित सरकारी कर्मचारी को दे दी जाए।
सामूहिक आकस्मिक अवकाश के मामले में स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी द्वारा व्यक्तिगत अस्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। अवकाश स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी सामूहिक आकस्मिक अवकाश को अस्वीकार करने का एक आदेश पारित करेगा। इस आदेश की एक प्रति जिसमें यह बताया गया हो कि आकस्मिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया है, सभी की जानकारी के लिए नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी। सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जाना, ड्यूटी से हड़ताल करने के रूप में अनुपस्थिति माना जाएगा।और संबंधित सरकारी कर्मचारी ड्यूटी से जानबूझकर अनुपस्थित रहने के दोषी माने जाएंगे।
➽नवागंतुकों को आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति हेतु निर्देश
FD Memo No. F.5(1)FD(Rules)/56 dated 11.01.1956.
FD Memo No. F.5(1)FD(Rules)/56 dated 11.01.1956.
सामान्यतः एक राजकीय कर्मचारी को एक वर्ष में 15 दिन का आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किया जाता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति वर्ष के दौरान सेवा में शामिल होता है, तो उसे 15 दिन के आकस्मिक अवकाश का पूरा कोटा नहीं दिया जा सकता। सामान्य नियमों के अधीन शासकीय कर्मचारियों को निम्नलिखित तरीके से आकस्मिक अवकाश प्रदान किया जाना चाहिए :-
(a) 3 महीने या उससे कम की सेवा के लिए 5 दिनों तक;
(b) तीन महीने से अधिक लेकिन छह महीने से कम की सेवा के लिए 10 दिनों तक; और
(c) छह महीने से अधिक की सेवा के लिए 15 दिनों तक।]
➽सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति
सामान्यतः एक राजकीय कर्मचारी को एक वर्ष में 15 दिन का आकस्मिक अवकाश स्वीकार्य होता है, हालाँकि वर्ष के दौरान सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी के संबंध में सामान्य नियमों के अधीन नीचे दी गई सीमा तक आकस्मिक अवकाश स्वीकार्य होगा :-
(a) सेवानिवृत्ति के वर्ष में 3 महीने या उससे कम की सेवा के लिए 5 दिनों तक;
(b) सेवानिवृत्ति के वर्ष में 3 महीने से अधिक लेकिन 6 महीने तक की सेवा के लिए 10 दिनों तक; और
(c) सेवानिवृत्ति के वर्ष में 6 महीने से अधिक की सेवा के लिए 15 दिनों तक।
2. यह आदेश सेवा के दौरान मृत्यु के मामलों में लागू नहीं होगा।
3. यह आदेश 01.01.2002 से लागू होगा। पुराने मामलों को फिर से खोलने की आवश्यकता नहीं है।]
➽ असाधारण अवकाश की स्वीकृति के माध्यम से ड्यूटी से अनुपस्थिति की अवधि का नियमितीकरण।
जो कर्मचारी हड़ताल, सामूहिक आकस्मिक अवकाश या किसी भी प्रकार के कार्य बहिष्कार में शामिल रहे हैं, उनकी ड्यूटी से अनुपस्थिति की अवधि के नियमितीकरण के मामले को अतीत में अलग-अलग तरीकों से निपटाया गया है। यह आवश्यक समझा गया है कि ऐसे मामलों में कर्तव्य से अनुपस्थिति की अवधि को एक समान तरीके से नियमित किया जाए।
राज्यपाल महोदय सहर्ष आदेश देते हैं कि कार्यालय समय की किसी भी अवधि के लिए हड़ताल, सामूहिक आकस्मिक अवकाश और कार्य के बहिष्कार में भाग लेने वाले कर्मचारियों की ड्यूटी से अनुपस्थिति को केवल "काम नहीं तो वेतन नहीं" के सिद्धांत के तहत असाधारण अवकाश स्वीकृत करके ही नियमित किया जाएगा।
असाधारण अवकाश की ऐसी अवधि को वेतन वृद्धि, अर्हकारी सेवा तथा किसी अन्य सेवा लाभ के लिए सेवा के रूप में नहीं गिना जाएगा।
इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 5 अक्टूबर 2018 के संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है कि उक्त आदेश में भूतलक्षी प्रभाव ( पूर्व प्रभाव) से लागू होने के संबंध में उल्लेख नहीं हैं। अतः आदेश दिनांक 05.10.2018 से पूर्व के प्रकरणों का निस्तारण उपार्जित अवकाश स्वीकृत कर किया जायेगा। उपार्जित अवकाश शेष नहीं होने पर प्रकरणों का निस्तारण असाधारण अवकाश स्वीकृत कर किया जायेगा। आदेश दिनांक 05.10.2018 एवं पश्चातवर्ती प्रकरणों का निस्तारण उक्त आदेश के अनुसार ही किया जायेगा।
इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 5 अक्टूबर 2018 को अधिक्रमित करते हुए, इस मामले पर पुनः विचार किया गया है तथा राज्यपाल महोदय को यह आदेश प्रदान करते हुए प्रसन्नता हुई है कि हड़ताल, सामूहिक आकस्मिक अवकाश तथा कार्य बहिष्कार में भाग लेने/भाग ले चुके कर्मचारियों की कार्यालय समय की किसी भी अवधि के लिए ड्यूटी से अनुपस्थिति को केवल असाधारण अवकाश प्रदान करके “कार्य नहीं तो वेतन नहीं” (No Work No Pay) के सिद्धांत के आधार पर नियमित किया जाएगा।
तथापि, असाधारण अवकाश की ऐसी अवधि को सभी प्रयोजनों के लिए सेवा में गिना जाएगा, जिसमें वेतनवृद्धि भी शामिल है। यह आदेश दिनांक 05.10.2018 से प्रभावी हुआ माना जाएगा।
➽आकस्मिक अवकाशों का संयोजन
F.D Clarification No. F.1(44) FD(Gr.2)/83, dated 30.12.1985.
एक वर्ष की आकस्मिक अवकाश को अगले वर्ष की आकस्मिक अवकाश के साथ जोड़ना अनुमेय नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि कोई सरकारी कर्मचारी वर्ष के अंतिम दिन अर्थात 31 दिसम्बर (या अवकाशकालीन विभागों में 30 जून) को आकस्मिक अवकाश पर है, तो उसे अगले वर्ष के प्रथम दिन अर्थात 1 जनवरी (या अवकाशकालीन विभागों में 1 जुलाई) से पुनः आकस्मिक अवकाश लेने की अनुमति नहीं होगी, भले ही दोनों वर्षों की आकस्मिक अवकाश मिलाकर कुल अवधि एक बार में निर्धारित अधिकतम 10 कार्य दिवस से अधिक न हो। यह स्पष्टीकरण 1 जनवरी, 1986 से प्रभावी होगा।
F.D Clarification No. F.1 (44) FD (Gr.2)/83, dated 02.04.1991
वित्त विभाग की समसंख्यक स्पष्टीकरण दिनांक 30.12.1985 का स्थान लेते हुए यह स्पष्ट किया जाता है कि
एक वर्ष के आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) को अगले वर्ष के आकस्मिक अवकाश के साथ जोड़ा जा सकता है, बशर्ते कि दोनों वर्षों के अवकाश को मिलाकर एक बार में अधिकतम 10 कार्य दिवस से अधिक न हों। यह स्पष्टीकरण 1 जनवरी, 1986 से प्रभावी होगा।
राजस्थान सेवा नियम, खंड-II के परिशिष्ट-I के भाग-III “आकस्मिक अवकाश (Casual Leave)” में दिए गए राजस्थान सरकार के निर्णय संख्या 3 के अनुसार, रविवार, राजपत्रित अवकाश तथा साप्ताहिक अवकाश, जो आकस्मिक अवकाश की अवधि से ठीक पहले आते हैं या उसके अंत में आते हैं, उन्हें आकस्मिक अवकाश के साथ जोड़ा (Prefix/Suffix) जा सकता है। जो रविवार, राजपत्रित अवकाश या साप्ताहिक अवकाश आकस्मिक अवकाश की अवधि के बीच में आते हैं, उन्हें आकस्मिक अवकाश का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
यह आदेश 1 दिसंबर, 1964 से प्रभावी होगा।
➽प्रोबेशन काल में आकस्मिक अवकाश (CL)
7 वे वेतनमान की मूल अधिसूचना 30/10/2017 के अनुसार प्रोबेशन काल में एक वर्ष में 15 CL देने का प्रावधान है। अवकाशकालीन कार्मिको के CL की गणना 01 जुलाई से 30 जून तक की जाती है एवं अन्य कर्मचारियों के CL की गणना केलेंडर वर्ष के अनुसार 01 जनवरी से 31 दिसम्बर तक की जाती है। एक कलैंडर वर्ष से कम अवधि के लिए आकस्मिक अवकाश अनुपातिक रूप से देय होंगे (एक complete माह की सेवा पूर्ण करने पर 1.25 CL देय होगी)
राजस्थान सेवा नियम, खंड-II के परिशिष्ट-I के भाग-III-A.
अवकाश के बदले क्षतिपूर्ति (आकस्मिक) अवकाश (Compensation Casual Leave)
1. रविवार तथा अन्य राजपत्रित अवकाशों के दिनों में अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित होने पर, मंत्रालयिक संवर्ग के किसी कर्मचारी को उतने दिनों का क्षतिपूर्ति अवकाश दिया जाना उचित है, जितने दिनों के लिए उसे कार्यालय में उपस्थित होने के लिए बाध्य किया गया हो।
लेकिन यदि ऐसी उपस्थिति कर्मचारी पर दंड के रूप में लगाई गई हो, तो उसके लिए क्षतिपूर्ति अवकाश देय नहीं होगा।
इस निर्देश के अंतर्गत अर्जित क्षतिपूर्ति अवकाश, वर्ष में सामान्यतः देय 15 दिनों के आकस्मिक अवकाश के अतिरिक्त होगा।
2. इस अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश का लाभ प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि ऐसी उपस्थिति प्रभारी राजपत्रित अधिकारी के पूर्व लिखित आदेश के आधार पर हो। आदेश में प्रभारी अधिकारी को स्पष्ट रूप से यह उल्लेख करना होगा कि कार्यालय में उपस्थिति ‘अनिवार्य (Compulsory)’ है या नहीं
3. वास्तव में अर्जित क्षतिपूर्ति अवकाश, संबंधित सरकारी कर्मचारी को आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा प्रदान किया जाएगा। इसके लिए वही शर्तें लागू होंगी, जो आकस्मिक अवकाश प्रदान करने के लिए निर्धारित हैं।
क्षतिपूर्ति आकस्मिक अवकाश को आकस्मिक अवकाश की श्रेणी में रखा गया है एंव क्षतिपूर्ति आकस्मिक अवकाश रविवार या अन्य राजपत्रिक अवकाशों पर मंत्रालयिक कर्मचारियों को कार्यालय में उपस्थिति देने के एवज में देय होता है।नोट: उपरोक्त निर्देश के बदले, रविवार या अन्य अवकाश पर उपस्थिति के लिए वाहन शुल्क या अतिरिक्त पारिश्रमिक का कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उपर्युक्त आदेश 01.01.1964 से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर भी लागू होगा।
1. यह अवकाश केवल मंत्रालियक कर्मचारी (सहायक ग्रेड- प्रथम / द्वितिय / सहायक कार्यालय अधीक्षक आदि पदों को देय होता है ।
2. अध्यापक या अन्य पद पर कार्यरत किसी भी कर्मचारी/अधिकारी क क्षतिपूर्ति अवकाश देय नही होगा ।
3. क्षतिपूर्ति अवकाश किसी भी राजपत्रित अवकाश दिवस में किये गये कार्य के बदले में देय होगा ।
4. फिक्स वेतन पर कार्य करने वाले कार्मिक को उसके आकस्मिक अवकाश के बराबर देय होगा । (एक वर्ष मे 12 दिन से अधिक देय नहीं)
5. क्षतिपूर्ति अवकाश का एक साथ उपयोग निरन्तर 10 दिवस तक किया जा सकता है।
6. क्षतिपूर्ति अवकाश को आकस्मिक अवकाश की श्रेणी में रखा गया है।
7. क्षतिपूर्ति अवकाश का हिसाब 01 जनवरी से 31 दिसम्बर तक रहेगा।
8. क्षतिपूर्ति अवकाश सेवा पुस्तिका में आने वाले किसी अवकाश के साथ में नही लिया जा सकता है यह केवल आकस्मिक अवकाश के साथ उपयोग में लिया जा सकता है ।
9. क्षतिपूर्ति अवकाश का उपभोग उसी वर्ष के भीतर करना अनिवार्य है अन्यथा यह अवकाश आकस्मिक अवकाश की भाँति लैप्स माना जाएगा।
10. क्षतिपूर्ति अवकाश की लिमिट 15 दिवस है जितने राजपत्रित अवकाश के दिन मंत्रालयिक कार्मिक कार्य करेगा उतने दिनो का ही उसे मिलेगा।
11. यह अवकाश आधे दिन के लिए उपभोग नही किया जा सकता है।

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