दो से कम जीवित संतान वाली महिला सरकारी कर्मचारी को उसके सम्पूर्ण सेवा काल में दो बार प्रसूति अवकाश, अवकाश प्रारम्भ होने की तिथि से अधिकतम 180 दिन की अवधि तक स्वीकृत किया जा सकेगा।
परन्तु, यदि दो बार प्रसूति अवकाश का लाभ लेने के उपरान्त भी कोई जीवित संतान न हो, तो उसे एक अतिरिक्त अवसर पर पुनः प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।
प्रसूति अवकाश की अवधि में महिला सरकारी कर्मचारी को अवकाश पर जाने से ठीक पूर्व आहरित वेतन के बराबर अवकाश वेतन (Leave Salary) देय होगा।
यह अवकाश कर्मचारी के अवकाश खाते (Leave Account) में डेबिट नहीं किया जाएगा, तथापि इसकी पृथक प्रविष्टि सेवा पुस्तिका (Service Book) में की जाएगी।
टिप्पणी : दो से कम जीवित संतान वाली महिला सरकारी कर्मचारी को गर्भपात (Miscarriage), जिसमें चिकित्सकीय गर्भसमापन (Abortion) भी सम्मिलित है, की स्थिति में प्रसूति अवकाश एक अथवा दो अवसरों पर स्वीकृत किया जा सकेगा।
किन्तु, ऐसी अवकाश अवधि सम्पूर्ण सेवा काल में कुल मिलाकर अधिकतम 6 सप्ताह तक ही देय होगी।
यह अवकाश तभी स्वीकृत किया जाएगा, जब अवकाश आवेदन के साथ प्राधिकृत चिकित्सा परिचर (Authorised Medical Attendant) द्वारा जारी प्रमाण-पत्र संलग्न हो।
राजस्थान सरकार का निर्णय
1. इस नियम के अंतर्गत अस्थायी महिला सरकारी कर्मचारियों को भी प्रसूति अवकाश (Maternity Leave) देय होगा।
2. अपूर्ण गर्भपात (Incomplete Abortion) की स्थिति में प्रसूति अवकाश देय नहीं होगा।
स्पष्टीकरण :
‘गर्भसमापन (Abortion)’ में ‘गर्भपात की आशंका (Threatened Abortion)’ सम्मिलित नहीं है। अतः गर्भपात की आशंका (Threatened Abortion) की स्थिति में प्रसूति अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकेगा।
ज्ञापन
महिला राजकीय कर्मचारी, यदि बच्चे के जन्म से 15 दिवस पूर्व से लेकर बच्चे के जन्म के तीन माह की अवधि के भीतर राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करती है, तो वह मातृत्व अवकाश प्राप्त करने की हकदार होगी, भले ही बच्चे का जन्म उसके राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने अथवा नियुक्ति आदेश जारी होने से पूर्व हुआ हो।
अतः ऐसी महिला राजकीय कर्मचारी, जो बच्चे के जन्म के समय राजकीय सेवा में नहीं थी, यदि राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने के पश्चात मातृत्व अवकाश प्रदान किए जाने हेतु आवेदन करती है, तो उसे राजस्थान सेवा नियमों के नियम 103 के अंतर्गत 180 दिवस का मातृत्व अवकाश, निम्नलिखित अवधियों के योग को घटाकर, अनुमन्य किया जा सकेगा—
(1) महिला राजकीय कर्मचारी द्वारा राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने से पूर्व की अवधि
(क) बच्चे के जन्म से पूर्व प्रसव अवधि के 15 दिवस की अवधि।
(ख) राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने के समय बच्चे की आयु (दिवसों में)।
(2) महिला राजकीय कर्मचारी द्वारा राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने के पश्चात की अवधि
(ग) राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने की तिथि से महिला राजकीय कर्मचारी द्वारा मातृत्व अवकाश पर जाने की तिथि तक की अवधि (अधिकतम 15 दिवस तक सीमित)।
ऐसे प्रकरणों में मातृत्व अवकाश केवल तभी अनुमन्य होगा, जब महिला राजकीय कर्मचारी राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने की तिथि से 15 दिवस के भीतर मातृत्व अवकाश प्रदान किए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत करे।
उपर्युक्त ज्ञापन की प्रभावी तिथि 07.12.2020 होगी।
नियम 103A : पितृत्व अवकाश
दो से कम जीवित संतान वाले पुरुष सरकारी कर्मचारी को उसकी पत्नी के प्रसव के अवसर पर अधिकतम दो बार 15 दिन का पितृत्व अवकाश प्रदान किया जा सकेगा। यह अवकाश प्रसव से 15 दिन पूर्व से लेकर प्रसव के तीन माह बाद तक किसी भी समय लिया जा सकता है। यदि इस अवधि में अवकाश का उपयोग नहीं किया जाता है, तो वह स्वतः लैप्स (समाप्त) माना जाएगा।
इस अवकाश अवधि में सरकारी कर्मचारी को अवकाश पर जाने से ठीक पूर्व प्राप्त वेतन के बराबर अवकाश वेतन (Leave Salary) देय होगा।
पितृत्व अवकाश कर्मचारी के अवकाश खाते (Leave Account) में डेबिट नहीं किया जाएगा, बल्कि इसकी पृथक प्रविष्टि सेवा पुस्तिका (Service Book) में की जाएगी। इसे प्रसूति अवकाश की भाँति अन्य किसी भी प्रकार के अवकाश के साथ जोड़ा जा सकता है।
परन्तु, यदि सरकारी कर्मचारी की पत्नी का गर्भपात (Miscarriage) अथवा गर्भसमापन (Abortion) हुआ हो, तो उस स्थिति में पितृत्व अवकाश देय नहीं होगा।
नियम 104 :
मातृत्व अवकाश को किसी भी अन्य प्रकार के अवकाश के साथ लिया जा सकता है।
1. वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 02/02/ 1984
नियम 103 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्—
"103 : सक्षम प्राधिकारी किसी महिला सरकारी कर्मचारी को उसके सम्पूर्ण सेवा काल में अधिकतम तीन बार प्रसूति अवकाश स्वीकृत कर सकेगा। परन्तु, यदि तीन बार प्रसूति अवकाश का लाभ लेने के उपरान्त भी कोई जीवित संतान न हो, तो उसे एक अतिरिक्त अवसर पर पुनः प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।
यह प्रसूति अवकाश पूर्ण वेतन पर स्वीकृत होगा तथा इसकी अवधि अवकाश प्रारम्भ होने की तिथि से तीन माह की समाप्ति तक अथवा प्रसव की तिथि से छह सप्ताह की समाप्ति तक, इनमें से जो भी अवधि पहले समाप्त हो, तक होगी "
2. वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 25 /05/ 1985
(क) नियम 103 के विद्यमान पैरा 2 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाता है—
“प्रसूति अवकाश पूर्ण वेतन पर ऐसी अवधि के लिए स्वीकृत किया जा सकेगा, जो उसके प्रारम्भ होने की तिथि से अधिकतम 90 दिनों तक हो।”
(ख) नियम 103 के नीचे विद्यमान राजस्थान सरकार के निर्णय संख्या 2 के पश्चात निम्नलिखित “स्पष्टीकरण” जोड़ा जाता है—
स्पष्टीकरण
“‘गर्भपात (Abortion)’ में ‘गर्भपात की आशंका (Threatened Abortion)’ सम्मिलित नहीं है। अतः गर्भपात की आशंका की स्थिति में प्रसूति अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।”
3. वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 02/04/1998
राजस्थान सेवा नियमों के अंतर्गत विद्यमान नियम 103 तथा उसके अधीन दी गई टिप्पणी (Note), राजस्थान सरकार के निर्देश (Government of Rajasthan's Instructions) एवं स्पष्टीकरण (Clarification) को छोड़कर वर्तमान नियम 103 के स्थान पर निम्नलिखित नियम प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्—
"103. प्रसूति अवकाश : सक्षम प्राधिकारी किसी महिला सरकारी कर्मचारी को उसके सम्पूर्ण सेवा काल में दो बार प्रसूति अवकाश स्वीकृत कर सकेगा।
परन्तु, यदि दो बार प्रसूति अवकाश का लाभ लेने के उपरान्त भी कोई जीवित संतान न हो, तो उसे एक अतिरिक्त अवसर पर पुनः प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।
प्रसूति अवकाश पूर्ण वेतन (Full Pay) पर स्वीकृत होगा तथा इसकी अवधि अवकाश प्रारम्भ होने की तिथि से अधिकतम 120 दिवस तक हो सकेगी"
4. वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 06/12/2004
राजस्थान सेवा नियमों के अंतर्गत विद्यमान नियम 103, उसके अधीन दी गई टिप्पणी (Note) तथा स्पष्टीकरण (Clarification) को यथावत रखते हुए, नियम 103 के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाता है :
" 103. प्रसूति अवकाश : दो से कम जीवित संतान वाली महिला सरकारी कर्मचारी को प्रसूति अवकाश, उसके प्रारम्भ होने की तिथि से अधिकतम 135 दिवस की अवधि तक स्वीकृत किया जा सकेगा।
परन्तु, यदि दो बार प्रसूति अवकाश का लाभ लेने के उपरान्त भी कोई जीवित संतान न हो, तो उसे एक अतिरिक्त अवसर पर पुनः प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।
प्रसूति अवकाश की अवधि में महिला सरकारी कर्मचारी को अवकाश पर जाने से ठीक पूर्व आहरित वेतन के बराबर अवकाश वेतन (Leave Salary) देय होगा।
यह अवकाश अवकाश खाते (Leave Account) में डेबिट नहीं किया जाएगा, किन्तु इसकी पृथक प्रविष्टि सेवा पुस्तिका (Service Book) में की जाएगी। "
(i) नवीन नियम 103A का समावेश
विद्यमान नियम 103 के पश्चात निम्नलिखित नया नियम 103A जोड़ा जाएगा :
103A. पितृत्व अवकाश
दो से कम जीवित संतान वाले पुरुष सरकारी कर्मचारी को, उसकी पत्नी के प्रसव के अवसर पर, अधिकतम दो बार 15 दिवस का पितृत्व अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा। यह अवकाश पत्नी के प्रसव से 15 दिन पूर्व से लेकर प्रसव के तीन माह बाद तक की अवधि में लिया जा सकेगा। यदि इस अवधि में अवकाश का उपयोग नहीं किया जाता है, तो वह स्वतः लैप्स (समाप्त) हो जाएगा।
पितृत्व अवकाश की अवधि में सरकारी कर्मचारी को अवकाश पर जाने से ठीक पूर्व आहरित वेतन के बराबर अवकाश वेतन देय होगा। यह अवकाश अवकाश खाते में डेबिट नहीं किया जाएगा, इसकी पृथक प्रविष्टि सेवा पुस्तिका में की जाएगी तथा इसे प्रसूति अवकाश की भाँति किसी अन्य प्रकार के अवकाश के साथ संयोजित किया जा सकेगा।
सरकारी कर्मचारी की पत्नी के गर्भपात (Miscarriage), जिसमें चिकित्सकीय गर्भसमापन (Abortion) भी सम्मिलित है, की स्थिति में पितृत्व अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
5. वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 14/07/2006
नियम 103 के नीचे विद्यमान “टिप्पणी (Note)” के स्थान पर निम्नलिखित टिप्पणी प्रतिस्थापित की जाती है :
टिप्पणी : दो से कम जीवित संतान वाली महिला सरकारी कर्मचारी को गर्भपात (Miscarriage), जिसमें चिकित्सकीय गर्भसमापन (Abortion) भी सम्मिलित है, की स्थिति में प्रसूति अवकाश एक अथवा दो अवसरों पर स्वीकृत किया जा सकेगा।
परन्तु, ऐसे प्रसूति अवकाश की कुल अवधि सम्पूर्ण सेवा काल में अधिकतम छह सप्ताह तक ही देय होगी।
यह अवकाश तभी स्वीकृत किया जाएगा, जब अवकाश आवेदन के साथ प्राधिकृत चिकित्सा परिचर (Authorised Medical Attendant) द्वारा जारी प्रमाण-पत्र संलग्न हो
6. वित्त विभाग का परिपत्र दिनांक 06/11/2007
विभिन्न विभागों द्वारा महिला संविदा कार्मिकों को मातृत्व अवकाश की पात्रता के संबंध में संदर्भ वित्त विभाग को प्रेषित किए गए हैं। प्रकरण का परीक्षण किया गया है तथा महिला संविदा कार्मिकों को निम्नानुसार मातृत्व अवकाश प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है—
(i) राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में वित्त विभाग की पूर्वानुमति से नियोजित महिला संविदा कार्मिकों को अधिकतम दो जीवित संतानों के लिए दो माह तक का सवेतन मातृत्व अवकाश अनुमन्य किया जा सकेगा।
(ii) यदि कोई महिला संविदा कार्मिक चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर दो माह की अवधि से अधिक अवकाश हेतु आवेदन करती है, तो उसे अतिरिक्त ढाई माह तक का अवैतनिक अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।
7. वित्त विभाग के आदेश दिनांक 11/10/2008
नियम 103 में विद्यमान “135 दिवस” के स्थान पर “180 दिवस” प्रतिस्थापित किया जाता है।
8 वित्त विभाग की ज्ञापन दिनांक 23/12/2021
विषयः— ऐसी महिला राजकीय कर्मचारी को मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाना, जो बच्चे के जन्म के समय राजकीय सेवा में नहीं थी।
यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या ऐसी महिला राजकीय कर्मचारी, जो बच्चे के जन्म के समय राजकीय सेवा में नहीं थी, राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने के पश्चात राजस्थान सेवा नियमों के नियम 103 के अंतर्गत मातृत्व अवकाश की हकदार होगी अथवा नहीं।
राजस्थान सेवा नियमों के नियम 103 के अंतर्गत दो से कम जीवित संतानों वाली महिला राजकीय कर्मचारी को मातृत्व अवकाश प्रारंभ होने की तिथि से अधिकतम 180 दिवस की अवधि तक मातृत्व अवकाश अनुमन्य है।
एस.बी.सी.डब्ल्यू.पी. संख्या 4384/2020 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 07.12.2020 को निम्नानुसार निर्णय प्रदान किया गया है—
“प्रावधानों में सामंजस्य स्थापित करने की दृष्टि से, राजस्थान सेवा नियमों के नियम 103 एवं नियम 103A के संयुक्त अध्ययन के आधार पर यह घोषित किया जाता है कि महिला राजकीय कर्मचारी, यदि वह प्रसव अवधि के दौरान, अर्थात् बच्चे के जन्म से 15 दिवस पूर्व से लेकर बच्चे के जन्म के तीन माह पश्चात की अवधि के भीतर राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करती है, तो वह मातृत्व अवकाश प्राप्त करने की हकदार होगी, भले ही बच्चे का जन्म उसके राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने अथवा नियुक्ति आदेश जारी होने से पूर्व हुआ हो।”
उपरोक्त निर्णय के दृष्टिगत प्रकरण पर विचार किया गया है तथा राज्यपाल महोदय यह आदेश प्रदान करते हुए प्रसन्न हैं कि ऐसी महिला राजकीय कर्मचारी, जो बच्चे के जन्म के समय राजकीय सेवा में नहीं थी, यदि राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने के पश्चात मातृत्व अवकाश प्रदान किए जाने हेतु आवेदन करती है, तो उसे राजस्थान सेवा नियमों के नियम 103 के अंतर्गत 180 दिवस का मातृत्व अवकाश, निम्नलिखित अवधियों के योग को घटाकर, अनुमन्य किया जा सकेगा—
(1) महिला राजकीय कर्मचारी द्वारा राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने से पूर्व की अवधि
(क) बच्चे के जन्म से पूर्व प्रसव अवधि के 15 दिवस की अवधि।
(ख) राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने के समय बच्चे की आयु (दिवसों में)।
(2) महिला राजकीय कर्मचारी द्वारा राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने के पश्चात की अवधि
(ग) राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने की तिथि से महिला राजकीय कर्मचारी द्वारा मातृत्व अवकाश पर जाने की तिथि तक की अवधि (अधिकतम 15 दिवस तक सीमित)।
ऐसे प्रकरणों में मातृत्व अवकाश केवल तभी अनुमन्य होगा, जब महिला राजकीय कर्मचारी राजकीय सेवा में कार्यग्रहण करने की तिथि से 15 दिवस के भीतर मातृत्व अवकाश प्रदान किए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत करे।
9 वित्त विभाग की ज्ञापन दिनांक 29/11/2022
विषयः— ऐसी महिला राजकीय कर्मचारी को मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाना, जो बच्चे के जन्म के समय राजकीय सेवा में नहीं थी।
बच्चे के जन्म के समय राजकीय सेवा में नहीं रही महिला राजकीय कर्मचारी को मातृत्व अवकाश वित्त विभाग के समसंख्यक ज्ञापन दिनांक 23.12.2021 द्वारा अनुमन्य किया गया था। उक्त ज्ञापन माननीय उच्च न्यायालय द्वारा एस.बी.सी.डब्ल्यू.पी. संख्या 4384/2020 में दिनांक 07.12.2020 को दिए गए निर्णय के परिप्रेक्ष्य में जारी किया गया था।
ज्ञापन दिनांक 23.12.2021 में इसके प्रवर्तन हेतु कोई विशिष्ट प्रभावी तिथि अंकित नहीं की गई थी, जबकि माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय की तिथि 07.12.2020 है।
तदनुसार, प्रकरण पर पुनर्विचार किया गया है तथा राज्यपाल महोदय यह आदेश प्रदान करते हुए प्रसन्न हैं कि उपर्युक्त ज्ञापन की प्रभावी तिथि, ज्ञापन दिनांक 23.12.2021 के जारी होने की तिथि के स्थान पर, माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय की तिथि अर्थात् 07.12.2020 होगी।
10. वित्त विभाग की अधिसूचना दिनांक 26/02/2002
वर्तमान नियम 104 के स्थान पर निम्नलिखित नियम प्रतिस्थापित किया जाएगा—
104. मातृत्व अवकाश के साथ अवकाश का संयोजन मातृत्व अवकाश को किसी भी अन्य प्रकार के अवकाश के साथ जोड़ा जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त, नियम 104 के नीचे विद्यमान ‘नोट (NOTE)’ तथा ‘स्पष्टीकरण (Clarification)’ को विलोपित (Deleted) माना जाएगा।

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