मेवाड़ एवं गुहिल वंश के शासक
मेवाड़ एवं गुहिल वंश के शासक 

❖ वैदिक काल में ऋगवेद में राजस्थान प्रदेश को 'ब्रह्मवर्त' कहा ग

❖ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महर्षि वाल्मिक ने रामायण में राजस्थान प्रदेश को 'मरुकांतर' कहकर संबोधित किया।

❖ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महर्षि वाल्मिक ने रामायण में राजस्थान प्रदेश को 'मरुकांतर' कहकर संबोधित किया।

❖ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महर्षि वाल्मिक ने रामायण में राजस्थान प्रदेश को 'मरुकांतर' कहकर संबोधित किया।

❖ बसंतगढ़ शिलालेख (सिरोही) में राजस्थान के लिए "राजस्थानीयादित्य" शब्द का उल्लेख मिलता है, जो संभवतः इस क्षेत्र के लिए प्रयुक्त सबसे प्राचीन लिखित प्रमाणों में से एक है।

❖ ऐसा माना जाता है, की सन् 1800 ई. में जॉर्ज थॉमस ने इस भू-भाग के लिए सर्वप्रथम ‘राजपूताना’ शब्द का प्रयोग किया। इसका लिखित प्रमाण विलियम फ्रेंकलिन की पुस्तक “मिलिट्री मेमायर्स ऑफ मिस्टर जॉर्ज थॉमस” में मिलता है।

❖ 1829 ई. में कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक “द एनाल्स एंड एंटीक्स ऑफ राजस्थान” में इस प्रदेश के लिए ‘रायथान’ (राजाओं के निवास का प्रान्त ) या ‘राजस्थान’ शब्दों का प्रयोग किया।

❖ 26 जनवरी 1950 को इस प्रदेश का नाम विधिवत् रूप से राजस्थान स्वीकार किया गया।

☬ गुहिल वंश

❖ मेवाड़ पर पहले मेद अर्थात मेव या मेर जाति का वर्चस्व के कारण संभवतः इसे मेदपाट कहा जाता था।

❖ प्राचीन काल में मेवाड़ के नाम मेदपाट, प्राग्वाट, शिवि आदि थे।

❖ मुहणोत नैणसी की पुस्तक “ नैणसी री ख्यात” में गुहिल वंश की 24 शाखाओ का वर्णन मिलता है।

❖ कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार, गुहिल वंश की उत्पत्ति वल्लभी के शासक शीलादित्य और उनकी रानी पुष्पावती के वंश से हुई है ।

❖ गौरीशंकर हीराचंद ओझा गुहिलों को विशुद्ध रूप से प्राचीन भारतीय सूर्यवंशी मानते हैं।

❖ अबुल फजल की पुस्तक 'आइन-ए-अकबरी' के अनुसार गुहिल वंश के लोग ईरान के बादशाह नौशेखां आदिल शाह के वंशज थे।

❖ गौरीशंकर हीराचंद ओझा के अनुसार राजा गुहिलादित्य /गुहादित्य /गुहिल ने 566 ई. में मेवाड़ में गुहिल वंश की नींव रखी।

❖ बप्पा रावल को मेवाड़ के गुहिल वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।

❖ गुहिल राज्य के चिन्ह में "जो दृढ़ राखे धर्म को ताहि राखे करतार" अंकित है।

❖ एकलिंगजी (शिव) मेवाड़ के गुहिल वंश के कुलदेवता हैं, और बाण माता इस राजवंश की कुलदेवी हैं।

❖ मेवाड़ के राजा स्वयं को राजा नहीं मानते, बल्कि स्वयं को एकलिंगजी का 'दीवान' मानकर शासन करते थे।

❖ मेवाड़ की राजकीय धार्मिक परंपरा में एकलिंगजी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।

❖ मेवाड़ में जागीरदार द्वारा अपनी आय का 1/6 (छठा हिस्सा) शासक या प्रशासक को देने की प्रथा को 'छंटूंद'  कहा जाता था।

❖ मेवाड़ रियासत में मापा व्यापारिक वस्तुओं के आयात और निर्यात पर राज्य द्वारा लिया जाने वाला एक प्रकार का कर या शुल्क था।

❖ गुहिलादित्य से लेकर रतनसिंह तक इस वंश का शासन माना जाता है।

❖ रणसिंह के दो पुत्र थे - क्षेमसिंह एवं राहप । क्षेमसिंह ने मेवाड़ की रावल शाखा को जन्म दिया तथा राहप ने सीसोदा ग्राम की स्थापना कर राणा शाखा (सिसोदिया वंश) की नींव डाली।

☬ कालभोज/बप्पा रावल (734–753 ई.)

❖ बप्पा रावल को मेवाड़ के गुहिल वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। बप्पा रावल गुहिल वंश का सबसे प्रथम प्रतापी शासक था।

❖ बप्पा रावल का वास्तविक नाम कालभोज था। 'बप्पा रावल' इनकी उपाधि थी जो इन्हें इनके गुरु हारित ऋषि ने दी थी।

❖ राजप्रशस्ति के अनुसार बप्पा रावल ने अपने गुरु हारित ऋषि के आशीर्वाद से 734 ई. में मान मौर्य/मोरी (मानसिंह मौर्य) को हराकर चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया था। 

❖ बप्पा रावल ने नागदा (उदयपुर) को गुहिल वंश की प्रथम राजधानी बनाया।

❖ मेवाड़ के प्रतापी शासक बप्पा रावल को (I) हिन्दू सूरज (II) राजगुरु (III) चक्कवै आदि उपाधियों से जाना जाता है।

❖ बप्पा रावल ने उदयपुर के उत्तर में कैलाशपुरी में एकलिंगजी महाराज का मन्दिर 734 ई. में निर्माण करवाया।

❖ बप्पा रावल प्रथम गुहिल शासक थे जिसने मेवाड़ में सोने के सिक्के चलाए इस सिक्के का तोल 115 ग्रेन (65 रत्ती) है।

❖ बप्पा रावल ने नागभट्ट प्रथम और जयसिंह के साथ मिलकर अरबों के विरुद्ध संघर्ष किया और उनको पूर्व की ओर बढ़ने से सफलतापूर्वक रोका था।

❖ बप्पा रावल ने गजनी (अफगानिस्तान) के राजा सलीम को हराकर अपने भान्जे को गजनी का राजा बनाया था।

❖ प्रसिद्ध इतिहासकार चिंतामणि विनायक वैद्य (सी. वी. वैद्य) ने मेवाड़ के प्रतापी शासक बप्पा रावल की तुलना फ्रांसीसी सेनापति चार्ल्स मार्टेल (जिसने यूरोप में सर्वप्रथम मुसलमानों को परास्त किया) से की।

☬ अल्लट- (951- 953 ई.)

❖ रावल अल्लट 951 ई. में मेवाड़ के शासक बने। और 951 से 953 ई. तक मेवाड़ पर शासन किया।   

❖ रावल अल्लट को "आलू रावल"  के नाम से भी जाना जाता था। 

❖ रावल अल्लट ने आहड़ को अपनी दूसरी राजधानी बनाया। 

❖ अल्लट मेवाड़ में नौकरशाही की शुरूआत करने वाले प्रथम शासक था।

❖ रावल अल्लट ने हूण राजकुमारी 'हरिया देवी' से विवाह किया था, जिसे राजस्थान के इतिहास का पहला अंतर्राष्ट्रीय विवाह माना जाता है।

❖ रावल अल्लट ने आहड़ में वराह मंदिर का निर्माण करवाया।

❖ 953 ई. का सारणेश्वर (आहाड़) अभिलेख में रावल अल्लट के शासनकाल और प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करता है।

☬ रावल जैत्रसिंह- (1213 - 1252 ई)

❖ रावल जैत्र सिंह के समय दिल्ली सल्तनत पर बादशाह इल्तुतमिश का शासन था।

❖ जयसिंह सूरी के ग्रन्थ हमीर मदमर्दन के अनुसार सन् 1227 ई. में रावल जैत्रसिंह व दिल्ली के शासक इल्तुतमिश के मध्य “भूताला (उदयपुर ) का युद्ध” हुआ, जिसमें जैत्रसिंह ने इल्तुतमिश को बुरी तरह हराया।

❖ भुताला के युद्ध में इल्तुतमिश की भागती हुई सेना ने मेवाड़ के नागदा को लुट लिया था। इसके बाद रावल जैत्रसिंह ने परमारों से चित्तौड़ को छीनकर उसे मेवाड़ की नई राजधानी बनाया।

❖ दशरथ शर्मा ने रावल जैत्रसिंह के शासनकाल को ‘मध्यकालीन इतिहास का स्वर्णकाल’ की संज्ञा दी है।

☬ रावल तेजसिंह (1252–1267 ई.)

❖ जैत्र सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रावल तेजसिंह ने 1253 ई. से 1273 ई. तक मेवाड़ पर शासन किया।

❖ रावल तेजसिंह के शासनकाल में दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन बलबन ने मेवाड़ पर आक्रमण किया परन्तु असफल रहा । 

❖ रावल तेजसिंह के शासनकाल में आहड़ (उदयपुर) में चित्रकार कमलचंद्र द्वारा ताड़ के पत्तों पर “श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि” नामक ग्रंथ तैयार किया गया। जो मेवाड़ चित्रशैली का सबसे पहला चित्रित ग्रंथ है।

1267 से 1273 ईस्वी के दौरान मेवाड़ का कोई स्पष्ट राजा नहीं था। 

☬ रावल समरसिंह (1273–1302 ई.)

❖ रावल तेजसिंह के बाद उनका पुत्र समरसिंह मेवाड़ की गद्दी पर बैठा और 1273–1302 ई. तक मेवाड़ पर शासन किया। 

❖ सन् 1299 ई. में जब दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी की सेना गुजरात पर आक्रमण करने जा रही थी, तब मेवाड़ की सीमा से गुजरने के बदले में समरसिंह ने खिलजी की सेना से भारी कर वसूला था। 

❖ समर सिंह के दो पुत्र थे- रतन सिंह व कुंभकरण। कुंभकरण नेपाल चले गए और वहां नए गुहिल वंश की स्थापना की तथा रतन सिंह चित्तौड़ के शासक बने। 

☬ रावल रतनसिंह (1302- 1303 ई.)

❖ रावल रतनसिंह 1302 ई, में चित्तौड़ के सिंहासन पर बैठे थे । 

❖ रावल रतनसिंह के मेवाड़ की गद्दी पर बैठते ही अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का सामना करना पड़ा। अल्लाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर किए जाने वाले आक्रमण में खिलजी के साथ प्रसिद्ध लेखक अमीर खुसरो था। अमीर खुसरो के अनुसार अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए 28 जनवरी 1303 ई. को अपनी सेना सहित दिल्ली से रवाना हुआ अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पहुंचकर अपनी शाही सेना का शिविर गंभीरी नदी और बैङच नदी के मध्य लगाया तथा स्वयं अपना शिविर चित्तौड़ी नामक डूंगरी पर लगवाया। 

❖ इस आक्रमण के प्रमुख कारणों में अलाउद्दीन की साम्राज्यवादी नीति, चित्तौड़ का सामरिक व व्यापारिक महत्त्व था। 

❖ 1540 ई. में मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा रचित 'पद्मावत' में रानी पद्मिनी को प्राप्त करने की लालसा को भी एक कारण माना गया है। रावल रतनसिंह ने चेतन राघव को दरबार से निकाल दिया था तथा बाद में वह अलाउद्दीन खिलजी की शरण में चला गया। और उसके सामने महारानी पद्मिनी की तारीफ कर डाली और बदले की आग में जलते चेतन राघव ने बादशाह को चित्तौड़ पर आक्रमण के लिए तैयार कर लिया।

❖ युद्ध के दौरान रावल रतनसिंह और उनके दो महान सेनापति गौरा और बादल वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति (केसरिया) को प्राप्त हुए। और रानी पद्मिनी ने 1600 महिलाओं के साथ 26 अगस्त 1303 को जौहर की अग्नि में प्रवेश किया । यह संयुक्त घटना चित्तौड़ का प्रथम साका कहलाती है। 

❖ चित्तौड़ पर अधिकार करने के बाद अलाउद्दीन ने अपने पुत्र खिज्रखाँ को यहाँ का शासक नियुक्त कर दिया और चित्तौड़ का नाम बदलकर 'खिज्राबाद' रख दिया। कुछ समय बाद अलाउद्दीन खिलजी ने अपने बेटे खिज्र खाँ को हटाकर चित्तौड़ का राजा मालदेव सोनगरा (मुँछाला मालदेव) को बना दिया था।

❖ रावल रतनसिंह मेवाड़ के गुहिल वंश की 'रावल शाखा' के अंतिम शासक थे।

☬ राणा हम्मीर (1326- 1364 ई.)

❖ हम्मीर सिसोदा ठिकाने के जागीरदार थे इनके पिता क नाम अरिसिंह और माता का नाम उर्मिला कंवर था।

❖ राणा हम्मीर ने 1326 ई. में चित्तौड़ पर अधिकार कर मेवाड़ में गुहिल वंश की पुनः स्थापना की राणा हम्मीर सिसोदा गांव के होने के कारण आगे इस वंश का नाम सिसौदिया हो गया। राणा की उपाधि धारण करने वाला प्रथम शासक हम्मीर ही था।

❖ हम्मीर ने मूंजा बालेचा नाम के एक लूटेरे मौत के घाट उतार दिया। हम्मीर के चाचा अजय सिंह हम्मीर की इस वीरता और योग्यता से प्रभावित होकर अपने भतीजे हम्मीर को सिसोदा का उत्तराधिकारी घोषित किया ।

❖ जब राणा हम्मीर संकट में थे तब गुजरात के खोड़ गाँव में पहुंचे, तो वहाँ बरबड़ी चारण नाम की एक अमीर औरत से उनकी भेंट हुई। उन्होंने राणा हम्मीर को अपने पुत्र बारूजी के नेतृत्व में 500 अश्वारोही सैनिकों व धन देकर चित्तौड़गढ़ पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया।

❖ राणा हम्मीर के लगातार बढ़ते दबाव और आक्रमणों से तंग आकर मालदेव सोनगरा ने कूटनीति का सहारा लिया। और अपनी विधवा पुत्री सोंगरी का विवाह राणा हम्मीर से कर दिया।

❖ सिंगोली का युद्ध (1336 ई.) : सिंगोली का युद्ध 1336 ई में राणा हम्मीर और दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक की सेना के मध्य सिंगोली (मध्यप्रदेश) हुआ। इस युद्ध में राणा हम्मीर की विजय हुई और सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक को बंदी बना लिया। 

❖ इस युद्ध की जीत के बाद राणा हमीर ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग में बरवड़ी (वरुडी) माता का भव्य मंदिर का निर्माण करवाया, जो बाद में अन्नपूर्णा देवी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। बरवड़ी (वरुडी) माता  को हिंगलाज का अवतार माना जाता है।

❖ चित्तौड़गढ़ को मुस्लिम आधिपत्य से मुक्त कराने के कारण इन्हें “मेवाड़ का उद्धारक या मुक्तिदाता” कहा जाता है।

❖ कुंभलगढ़ प्रशस्ति और कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति में विकट परिस्थितियों में सिंह के समान अडिग रहने के कारण इन्हें “विषमघाटी पंचानन” की उपाधि दी गई है। 

❖ रसिक प्रिया के अनुसार राणा हम्मीर को "वीर राजा" की उपाधि दी गई थी।

❖ कर्नल जेम्स टॉड ने राणा हम्मीर को "प्रबल हिन्दू" की उपाधि दी।

☬ खेता या क्षेत्र सिंह (1364-1382 ई.)

❖ महाराणा क्षेत्र सिंह (जिन्हें राणा खेता भी कहा जाता है) राणा हम्मीर सिंह के पुत्र थे।

❖ मेंवाड़-मालवा संघर्ष की शुरुआत राणा क्षेत्र सिंह (खेता) के शासनकाल में हुई।

❖ राणा क्षेत्र सिंह की एक दासी थी जिसका नाम खातीन था। चाचा और मेरा इसी दासी के पुत्र थे । जिन्होंने राणा क्षेत्र सिंह के पोते महाराणा मोकल की हत्या कर दी।

☬ महाराणा लाखा /लक्षसिंह (1382- 1421 ई.)

❖ राणा लाखा को लक्षसिंह भी कहा जाता है। महाराणा लाखा सन् 1382 ई. में मेवाड़ के शासक बने और सन् 1421 ई. तक मेवाड़ पर शासन किया।

❖ मारवाड़ के राठौड़ शासक राव चूण्डा राठौड़ की पुत्री तथा रणमल की बहन हंसाबाई का विवाह मेवाड़ के राणा लाखा के ज्येष्ठ पुत्र राजकुमार चूंडा के साथ तय करने के लिए नारियल भेजा था। राणा लाखा ने मजाक में कह दिया कि ‘इस बुढ़ापे में हमारे लिए कौन नारियल भेजेगा’। नारियल पहुंचने के समय राजकुमार चूण्डा दरबार में उपस्थित नहीं थे। जब यह बात राजकुमार चूंडा को पता चली, तो उन्होंने अपना अधिकार त्याग दिया और हंसाबाई का विवाह अपने पिता राणा लाखा से करवाने का संकल्प लिया। हंसाबाई के भाई रणमल ने यह शर्त रखी कि हंसाबाई से उत्पन्न पुत्र ही मेवाड़ का अगला राजा बनेगा। राजकुमार चूण्डा ने प्रतिज्ञा की कि वे मेवाड़ के अगले राजा नहीं बनेंगे और हंसाबाई का पुत्र ही मेवाड़ का उत्तराधिकारी होगा और राणा लाखा का विवाह राजकुमारी हंसाबाई के साथ संपन्न हुआ।

❖ राजकुमार चूंडा ने अपने पिता के सुख और मेवाड़ की खातिर सिंहासन पर अधिकार न करने की प्रतिज्ञा ली। इसी कारण राजकुमार चूंडा को "मेवाड़ का भीष्म" कहा जाता है।

❖ राणा लाखा के काल में एक पिच्छू बंजारे ने अपने बैल की स्मृति में उदयपुर में 'पिछोला झील' का निर्माण करवाया गया था।

❖ उदयपुर के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक नगर बदनौर की स्थापना महाराणा लाखा ने की।

❖ राणा लाखा के काल में जावर खान की खोज हुई, महाराणा लाखा के समय इस खान से बड़ी मात्रा में चांदी और सीसा-जस्ता निकाला जाने लगा। 

☬ राणा मोकल (1421- 1433 ई.)

❖ राणा मोकल राणा लाखा व हंसाबाई का पुत्र था। 

❖ जब 1421 ई. में राणा मोकल मेवाड़ की राजगद्दी पर बैठा तो मोकल अल्पायु का होने के कारण कुँवर चूण्डा ने उनके संरक्षक के रूप में कार्यभार संभाला। परंतु मोकल की माता हंसाबाई को कुँवर चूण्डा पर संदेह रहता थ। जब राजमाता के इस संदेह का निवारण नही हो सका, तो कुँवर चूण्डा चित्तौड़ छोडक़र मांडू चला गया। और हंसाबाई के भाई राव रणमल ने मोकल के संरक्षण का कार्यभार संभाला।

❖ सन् 1433 में जीलवाड़ा नामक स्थान पर चाचा, मेरा, तथा महपा पंवार नामक तीन लोगों ने राणा मोकल की हत्या कर दी थी। 

❖ राणा मोकल ने चित्तौड़गढ़ किले में स्थित समिद्धेश्वर मंदिर/त्रिभुवन नारायण मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था।

❖ महाराणा मोकल के दरबार में मना, फना व विशल जैसे शिल्पी तथा योगेश्वर व भट्ट विष्णु जैसे विद्वान थे।

☬ राणा कुम्भा – (1433–1468 ई.)

❖ महाराणा कुंभा, महाराणा मोकल एवं सौभाग्य देवी के पुत्र थे। महाराणा मोकल की मृत्यु के बाद सन् 1433 ई. में महाराणा कुंभा मेवाड़ के शासक बने। उनका पूरा नाम कुंभकर्ण सिंह था।

❖महाराणा कुंभा एकमात्र ऐसे सिसोदिया शासक थे जिन्होंने युद्धभूमि पर शत्रु को पराजित किया, वास्तुकला में अमर कृतियाँ रचीं और संगीत-साहित्य में ऐसे ग्रंथ लिखे जो आज भी प्रासंगिक हैं।

❖महाराणा कुंभा एकमात्र ऐसे सिसोदिया शासक थे जिन्होंने युद्धभूमि पर शत्रु को पराजित किया, वास्तुकला में अमर कृतियाँ रचीं और संगीत-साहित्य में ऐसे ग्रंथ लिखे जो आज भी प्रासंगिक हैं।

❖ महाराणा कुंभा का कालखंड मेवाड़ के इतिहास का ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काल’ माना जाता है। 

❖ वीर विनोद पुस्तक के लेखक श्यामलदास के अनुसार मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्ग महाराणा कुम्भा ने बनवाए इनमें कुंभलगढ़ का किला प्रमुख है। अतः महाराणा कुंभा को राजस्थान के इतिहास में "वास्तुकला/स्थापत्य कला का जनक"  कहा जाता है, तथा महाराणा कुम्भा के काल को ‘स्थापत्य कला का स्वर्ण युग’ कहते हैं। 

❖ महाराणा कुम्भा ने गद्दी पर बैठते ही राणा मोकल के हत्यारे चाचा, मेरा और महपा को दण्डित करने के लिए रणमल राठौड़ को भेजा। रणमल ने चाचा और मेरा को मार दिया, किन्तु महपा चकमा देकर भाग गया। चाचा का पुत्र और महपा ने भागकर माण्डू (मालवा) के सुल्तान महमूद खिलजी के यहाँ शरण ली। राणा ने अपने विद्रोहियों को सुपुर्द करने के लिए सुल्तान के पास सन्देश भेजा तो सुल्तान ने मना कर दिया। अतः दोनों में युद्ध की सम्भावना हो गई।

❖ सारंगपुर (मध्य प्रदेश) का युद्ध : सन् 1437 ई. महाराणा कुम्भा और मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी के बीच सारंगपुर (मध्य प्रदेश) का युद्ध हुआ। जिसमे सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम को पराजित कर बंदी बना लिया। इस युद्ध में विजय की ख़ुशी में महाराणा कुम्भा ने विजय स्तभं का निर्माण करवाया । 

❖ राव रणमल की हत्या (1438 ई.) : राव रणमल, राणा कुंभा की दादी हंसाबाई का भाई था। उसने मेवाड़ के प्रशासनिक पदों पर मारवाड़ के राठौड़ सरदारों को नियुक्त करना शुरू कर दिया। मेवाड़ के शासन एवं दरबार में रणमल का हस्तक्षेप बढ़ने से सिसोदिया सरदारों में असंतोष फैल गया। सिसोदिया गुट का नेतृत्व कुंवर चूंडा के भाई राघवदेव कर रहे थे। राव रणमल ने भरे दरबार में राघवदेव की हत्या करवा दी। राघवदेव की हत्या के बाद राणा कुंभा के मन में रणमल के प्रति संदेह उत्पन्न हो गया और कुंभा ने मांडू से कुंवर चूंडा को मेवाड़ बुला लिया। रणमल की प्रेमिका भारमली ने रणमल को अत्यधिक शराब पिलाई, जिससे वह पूरी तरह बेहोश हो गया। 1438 ई. में शराब में मदहोश रणमल की हत्या कर दी गई। 

❖ आवल-बावल की संधि : रणमल का पुत्र राव जोधा उस समय इस संघर्ष से बच निकला और बाद में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को पुनः स्थापित करने के लिए संघर्ष करने लगा। अंत में राजमाता हंसाबाई की मध्यस्थता से मेवाड़ के शासक राणा कुंभा और मारवाड़ के शासक राव जोधा के बीच 1453 ईस्वी में सोजत (पाली) में आवल-बावल की संधि हुई। इस संधि के तहत मेवाड़-मारवाड़ की सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण किया गया और जोधा की पुत्री श्रृंगार देवी का विवाह कुंभा के पुत्र रायमल से किया गया। घोसुंडी की बावड़ी प्रशस्ति में इस संधि का उल्लेख है।

❖ चंपानेर की संधि : गुजरात के राजा कुतुबद्दीन शाह व मालवा के राजा महमूद खिलजी ने चांपानेर नामक स्थान पर 1456 में एक समझौता किया कि दोनों सेनाएँ मेवाड़ पर एक साथ आक्रमण करेगी। साथ ही यह भी समझौता हुआ की अगर जीत गए तो मेवाड़ का दक्षिण वाला भाग गुजरात में और बाकी सारा मालवा में मिला दिया जाएगा।

❖ पहाड़ी दुर्गों का स्वामी होने के कारण कारण महाराणा कुम्भा को "हालगुरु" की उपाधि दी गई है।

❖ मुस्लिम आक्रमणकारियों से भारत के हिन्दू धर्म की रक्षा करने के कारण महाराणा कुम्भा को "हिन्दू सुरताण" की उपाधि दी गई है।

❖ विद्यानुरागी व संगीत प्रेमी होने के कारण (संगीत कला में निपुण) महाराणा कुम्भा को "अभिनव भरताचार्य" की उपाधि दी गई थी।

❖ राजगुरु, दान गुरु, छाप गुरु, परम गुरु आदि महाराणा कुम्भा की अन्य उपाधियाँ है।

❖ संगीतराज, संगीतमीमांसा एवं सूड़ प्रबन्ध महाराणा कुम्भा के द्वारा रचित संगीत के ग्रन्थ थे। संगीतराज’ के पांच भाग- पाठरत्नकोश, गीतरत्नकोश, वाद्यरत्नकोश, नृत्यरत्नकोश और रसरत्नकोश हैं।

☬ महाराणा उदयसिंह प्रथम (1468 ई. से 1473 ई. तक)

❖ महाराणा उदयसिंह प्रथम को उदा भी कहा जाता है, मेवाड़ साम्राज्य के एक अत्यंत विवादास्पद महाराणा थे जिन्होंने 1468 ई. से 1473 ई. तक मेवाड़ पर शासन किया था।

❖ महाराणा उदा ने सत्ता की लालसा में 1468 ई. में कुंभलगढ़ के मामादेव कुंड/तालाब पर प्रार्थना कर रहे अपने पिता की हत्या कर दी और स्वयं को राजा घोषित कर दिया। इस कृत्य के कारण मेवाड़ के इतिहास में उन्हें 'पितृहंता' के रूप में जाना जाता है। मेवाड़ के इतिहास में महाराणा कुंभा की उनके पुत्र उदा द्वारा की गई हत्या की घटना को 'मेवाड़ का प्रथम कलंक' या मेवाड़ के इतिहास का सबसे बड़ा कलंक माना जाता है।

❖ दाड़िमपुर का युद्ध : पितृहन्ता होने के कारण मेवाड़ के राजपूत सरदारों ने इसे स्वीकार नहीं किया। सरदारों ने उदा के छोटे भाई रायमल को राणा बनाने का फैसला किया रायमल ने 'दाड़िमपुर के युद्ध' में उदा को बुरी तरह पराजित किया और 1473 ई. में मेवाड़ पर पुनः अधिकार कर लिया।

❖ मेवाड़ की गद्दी वापस पाने की लालसा में उदा मालवा (मांडू) के सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी के पास सहायता मांगने गया। यहाँ पर बिजली गिरने से उसकी मृत्यु हो गई।

☬ रायमल (1473-1509 ई.)

❖ रायमल महाराणा कुम्भा का बेटा था। रायमल 'दाड़िमपुर के युद्ध' में उदा को हराकर 1473 ई. में मेवाड़ का शासक बना।

❖ रायमल ने राव जोधा की बेटी शृंगारदेवी से विवाह करके राठौरों से शत्रुता समाप्त कर दी। 

❖ रानी शृंगारदेवी ने चित्तौड़ के निकट प्रसिद्ध घौसूंड़ी की बावड़ी का निर्माण करवाया ।

❖ रायमल के तीन महत्वाकांक्षी पुत्र थे  पृथ्वीराज सिसोदिया (जिन्हें तीव्र गति के कारण ‘उड़ना राजकुमार’ कहा जाता है), जयमल, और राणा सांगा (संग्राम सिंह) ।

❖ रायमल की मृत्यु के बाद राणा सांगा / संग्राम सिंह प्रथम मेवाड़ का शासक बना ।

☬ राणा सांगा / संग्राम सिंह प्रथम ( 1509–1528 ई.)

❖ महाराणा सांगा राजा रायमल के सबसे छोटे पुत्र थे। उनके बड़े भाई पृथ्वीराज सिसोदिया और जयमल सत्ता के प्रबल दावेदार थे, जिसके कारण भाइयों में आपस में भयंकर उत्तराधिकार का संघर्ष हुआ।

❖ पृथ्वीराज ने सांगा पर हमला करने से सांगा की एक आंख स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो गई।

❖ इस उत्तराधिकारी संघर्ष में अंत में महाराणा सांगा विजय हुए और 24 मई 1509 ई. को महाराणा सांगा का मेवाड़ के सिंहासन पर राज्याभिषेक हुआ। राणा साँगा ने मेवाड़ पर 1509 से 1528 तक शासन किया था।

❖ भोजराज ( मीराबाई का पति ) महाराणा सांगा का बेटा था।

❖ राणा सांगा के मेवाड़ के शासक बनने के समय दिल्ली सल्तनत का सुल्तान सिकंदर लोदी था।

❖ महाराणा सांगा ने तत्कालीन भारत की तीन प्रमुख मुस्लिम शक्तियों दिल्ली सल्तनत, मालवा और गुजरात को लगातार युद्धों में पराजित कर अपनी धाक जमाई।

❖ खातौली का युद्ध :  यह युद्ध 1517 ई. में मेवाड़ के महाराणा सांगा और दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच खातौली (कोटा) में लड़ा गया था। जिसमें महाराणा सांगा की विजय हुई। इस युद्ध में तलवार के वार से राणा सांगा का बायां हाथ कट गया था और घुटने में तीर लगने से उनका एक पैर हमेशा के लिए खराब हो गया था। 

❖ बाड़ी का युद्ध : अपनी हार का बदला लेने के लिए लोदी ने मियां माखन के नेतृत्व में पुनः विशाल सेना भेजी और महाराणा सांगा तथा इब्राहिम लोदी की सेना के बीच 1518 ई. में बाड़ी (धौलपुर) का युद्ध हुआ था । जिसमें महाराणा सांगा ने इब्राहिम लोदी की सेना को बुरी तरह पराजित किया था।

❖ गागरोन का युद्ध : राणा सांगा के समय मालवा का शासक महमूद खिलजी द्वितीय था। महाराणा सांगा ने मालवा से निष्कासित राजपूत सरदार मेदिनीराय को शरण दी थी और उसे चंदेरी तथा गागरोन का राज्य दिलाया था। जिसके कारण महाराणा सांगा व मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय के बीच 1519 ई. में झालावाड़ के निकट गागरोन का युद्ध लड़ा गया । इस युद्ध में महाराणा सांगा की विजय हुई और उन्होंने सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय को बंदी बना लिया ।

❖ बयाना का युद्ध : बयाना का युद्ध महाराणा सांगा और मुगल सम्राट बाबर की सेना के बीच 16 फरवरी 1527 ई को बयाना (भरतपुर) में लड़ा गया था। महाराणा सांगा की सेना ने बाबर के साले और मुख्य सेनापति मेहंदी ख्वाजा की मुगल सेना को चारों तरफ से घेरकर रोंद डाला और राणा सांगा ने बाबर की भेजी हुई सेना को बुरी तरह परास्त किया।

❖ खानवा का युद्ध : खानवा का युद्ध राणा सांगा एवं मुगल सम्राट बाबर के मध्य 17 मार्च, 1527 ई. को खानवा (भरतपुर) में हुआ। खानवा युद्ध से पूर्व बाबर ने रायसेन के सलहदी तंवर के माध्यम से राणा सांगा को शांति समझौते का प्रस्ताव भेजा था।

❖ बयाना की हार के बाद बाबर ने अपनी सेना में जोश भरने के लिए कूटनीति और धर्म का सहारा लिया।➥बाबर ने अपनी सेना को पुनर्गठित करने के लिए निम्न कदम उठाये।

➥बाबर ने इस युद्ध को साधारण लड़ाई न बताकर जिहाद/धर्मयुद्ध घोषित किया।

➥बाबर ने जीवनभर शराब न पीने की कसम खाई औरशराब के पात्र तोड़कर उन्हें नष्ट कर दिया।

➥बाबर ने मुस्लिम व्यापारियों से लिया जाने वाला ‘तमगा’ कर हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।

❖ महाराणा सांगा ने बाबर को भारत से बाहर खदेड़ने के लिए प्राचीन राजपूती परंपरा ‘पाती पेरणवन’  भेजकर सभी राजाओं को आमंत्रित किया था। उनके इस एक आह्वान पर के 7 राजा, 9 राव और 104 बड़े सरदार एक साथ युद्ध के मैदान में उतरे थे।

क्र. सं. राज्य/स्थान    शासक या प्रमुख

1. अफगान सुल्तान महमूद लोदी

2. मेव शासक हसन खाँ मेवाती (सांगा का सेनापति)

3. मारवाड़ राव मालदेव 

4. बीकानेर राव कल्याणमल 

5. आमेर पृथ्वीराज कच्छवाहा

6. मेड़ता रायमल राठौड़/वीरमदेव मेड़तिया

7. ईडर        भारमल

8. वागड़ (डूंगरपुर) महारावल उदयसिंह

9. देवलीया (प्रतापगढ़) रावत बाघसिंह

10. अजमेर               कर्मचंद पंवार

11. जगनेर (उत्तर प्रदेश) अशोक परमार

12. सादड़ी               झाला अज्जा

13. सलूम्बर               रतनसिंह चुंडावत

14. सिरोही अखेराज देवड़ा

15. परमार वंश गोकुलदास परमार

16. नागौर              खानजादा

17. रायसीन              सलहदी तंवर

❖ 17 मार्च 1527 ईस्वी को खानवा का महासंग्राम शुरू हुआ। राजपूतों के पारंपरिक प्रहारों के सामने शुरुआत में मुगल सेना लड़खड़ाने लगी। परंतु बाबर के तोपखाना और तुलगुमा युद्ध पद्धति का राजपूतों की सेना के पास कोई जवाब नहीं था। युद्ध के ऐन वक्त पर रायसेन (म० प०) के शासक सिलहदी तंवर और नागौर के खानजादा ने विश्वासघात किया और वे अपनी सेना सहित बाबर के शिविर में जा मिले, जिससे राजपूत सेना की कूटनीतिक कमान ढह गई। युद्ध के दौरान महाराणा सांगा के सिर में एक घातक तीर लगा, जिससे वे अचेत (बेहोश) हो गए। सांगा को बेहोश देखकर सेना का मनोबल न टूटे, इसलिए सादड़ी के झाला अज्जा ने सांगा के शाही छत्र और मुकुट को धारण किया और युद्ध का नेतृत्व करते हुए वीरगति पाई। और इस युद्ध में अंतिम रूप से बाबर विजय हुआ।  

❖ मालदेव और पृथ्वीराज कछवाहा ने अचेत महाराणा सांगा को युद्धभूमि से सुरक्षित बाहर निकालकर बसवा (दौसा) ले आए, जहाँ उनका प्राथमिक उपचार किया गया और बाद में उन्हें रणथंभौर दुर्ग में रखा गया था। 

❖ होश में आने के बाद सांगा ने बाबर से दोबारा युद्ध करने की कसम खाई थी। दोबारा युद्ध न चाहने वाले उनके कुछ सरदारों ने उन्हें धोखे से भोजन में धीमा जहर दे दिया था। विष के प्रभाव के कारण 30 जनवरी 1528 ई. को बसवा या कालपी के निकट सांगा की 30 जनवरी,1528 को मृत्यु हो गयी। महाराणा सांगा के पार्थिव शरीर को मेवाड़ के मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) लाया गया, जहाँ पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया । मांडलगढ़ में महाराणा सांगा की 8 खंभों की छतरी  बनी हुई है।

❖ खानवा के युद्ध में महमूद लोदी, हसन खाँ मेवाती, मालदेव, मेदिनी राय, कल्याणमल, राजा भारमल, वीरमदेव मेड़तिया आदि राणा सांगा के पक्ष में लड़े। 

❖ रावत जग्गा एवं रावत बाघ मेवाड़ के शासक राणा सांगा के प्रसिद्ध सरदार थे, जिन्होंने खानवा के युद्ध (1527 ई.) में बाबर के विरुद्ध वीरतापूर्वक लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।

❖ राणा सांगा को "हिंदूपत" उपाधि दी गई क्योंकि इन्होंने विभिन्न राजपूत राजाओं को संगठित करके विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ हिंदू एकता को मजबूत करने का प्रयास किया था।

❖ ब्रिटिश इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने राणा सांगा के अदम्य साहस और युद्धों में क्षत-विक्षत हुए शरीर को देखकर उन्हें “सैनिकों का भग्नावशेष” की संज्ञा दी थी, क्योंकि उनके शरीर पर 80 छोटे-बड़े घाव थे और उन्होंने अपनी एक आंख, एक हाथ और एक पैर युद्धभूमि में गंवा दिया था।

☬ राणा रतनसिंह द्वितीय (1528–1531 ई.)

❖ महाराणा सांगा के बड़े पुत्र भोजराज (मीराबाई के पति) थे। लेकिन युद्ध में इनकी मृत्यु के बाद महाराणा सांगा ने रतनसिंह द्वितीय को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।

❖ राणा सांगा की पत्नी कर्मावती (बूँदी की हाड़ा राजकुमारी) के भी दो पुत्र विक्रमादित्य और उदयसिंह थे। लेकिन महाराणा की मृत्यु के समय वे अल्पवयस्क थे। इसलिए महाराणा सांगा ने कर्मावती और उनके पुत्रों को रणथम्भौर की जागीर दे दी।

☬ विक्रमादित्य (1531-1536 ई.)

❖ राणा विक्रमादित्य 1531 ईस्वी में मेवाड़ के शासक बने थे। जिनका शासनकाल 1531 ईस्वी से 1536 ई. तक रहा।

❖ राणा सांगा की हाडी रानी कर्मावती के दो अल्प आयु पुत्र विक्रमादित्य व उदयसिंह थे। राणा रतनसिंह की मृत्यु के बाद राणा विक्रमादित्य मेवाड़ के शासक बने। विक्रमादित्य अल्प वयस्क होने के कारण रानी कर्मावती संरक्षिका बनी। 

❖ 1533 ई. में गुजरात के शासक बहादुर शाह ने मेवाड़ पर आक्रमण किया। इस समय रानी कर्मावती ने बहादुर शाह के साथ संधि कर ली तथा उसे रणथम्भौर का किला दे दिया।

❖ 1534-35 ई. में बहादुर शाह ने मेवाड़ पर पुनः आक्रमण कर दिया। उस समय रानी कर्मावती ने अपने पुत्रों विक्रमादित्य एवं उदयसिंह को उनके ननिहाल बूंदी भेज दिया तथा चित्तौड़ दुर्ग की रक्षा का भार देवलिया (वर्तमान प्रतापगढ़) के ठाकुर बाघसिंह को सौंप दिया।

❖ बहादुर शाह के आक्रमण का सामना करने के लिए रानी कर्मावती ने मुगल बादशाह हुमायूँ के पास राखी भेजकर सहायता की माँग की, लेकिन हुमायूँ समय पर सहायता नहीं पहुँचा सका। अंततः युद्ध में पराजय की आशंका के कारण रानी कर्मावती ने हजारों महिलाओं के साथ जौहर किया। वहीं, देवलिया (प्रतापगढ़) के ठाकुर बाघसिंह के नेतृत्व में राजपूत वीरों ने केसरिया किया। यह घटना चित्तौड़ का दूसरा साका के नाम प्रिसद्ध है। 

❖ मार्च , 1535 ई. में बहादुरशाह ने चितोड़ पर अधिकार कर लिया। मगर हुमायूँ के आने की खबर सुनकर उसने चित्तौड़ छोड़ दिया । अतः विक्रमादित्य ने पुनः चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया।

❖ सांगा के भाई पृथ्वीराज के दासी पुत्र बनवीर ने 1536 ई. में विक्रमादित्य की हत्या कर दी थी।

☬ उदय सिंह (1537-1572 ई.)

❖ महाराणा उदय सिंह द्वितीय का जन्म 4 अगस्त 1522 को चित्तौड़गढ़ दुर्ग में हुआ था।

❖ महाराणा उदय सिंह द्वितीय, राणा सांगा और रानी कर्णावती के पुत्र थे। 

❖ राणा सांगा के बाद मेवाड़ की गद्दी पर रतनसिंह बैठे और रतनसिंह की मृत्यु के बाद मेवाड़ की गद्दी पर विक्रमादित्य बैठे, लेकिन 1537 में दासी पुत्र बनवीर ने महाराणा विक्रमादित्य की हत्या कर सिंहासन पर कब्जा कर लिया और उदयसिंह को भी खत्म करने की योजना बनाई, लेकिन पन्ना धाय ने अपने बेटे चन्दन का बलिदान देकर महाराणा सांगा के बेटे उदयसिंह को बचाया था। आशा देवपुरा ने कुम्भलगढ़ के किले में पन्ना धाय तथा उदयसिंह को शरण दी थी।

❖ मावली (उदयपुर) में 1540 ई. में उदयसिंह तथा बनवीर के बीच युद्ध हुआ। जिसमे उदयसिंह ने बनवीर को हराकर चित्तौड़गढ़ पर पूर्ण अधिकार प्राप्त किया।

❖ 1559 ई. उदयसिंह के द्वारा उदयपुर की स्थापना की गई थी।

❖ उदयपुर के निकट बेड़च नदी के पानी को रोककर महाराणा उदयसिंह ने उदयसागर झील तथा मोती मगरी महल का निर्माण करवाया था।और अपनी राजधानी उदयपुर को बनाया।

❖ मालवा के अंतिम सुल्तान बाज बहादुर को 1562 में मुगलों (अब्दुल्ला खान के आक्रमण) से हारने के बाद चित्तौड़ के महाराणा उदय सिंह के यहाँ शरण मिली थी।

❖ मुगल सम्राट अकबर अपनी विस्तारवादी नीति के तहत मेवाड़ को अधीन करना चाहता था। अतः अकबर ने 1567 ई. में चित्तौड़ पर आक्रमण किया। महाराणा उदयसिंह ने सामंतों की सलाह पर किले की रक्षा का भार जयमल राठौड़ और फत्ता सिसोदिया को सौंपा और स्वयं परिवार सहित गोगुंदा की पहाड़ियों में चले गए।

❖ युद्ध में अकबर ने संग्राम बंदूक चलाई जिसकी गोली जयमल को लगी, जयमल ने अपने भतीजे कल्ला से कहा, मेरी लड़ने की इच्छा रह गई इसलिए मुझे अपने कंधे पर बिठाओं, मैं घोड़े पर नहीं बैठ सकता। कल्ला राठौड़ ने जयमल को कंधे पर बैठाकर लड़ा और इन दोनों के हाथों में दो-दो नंगी तलवारें थी, दोनों चाचा-भतीजे वीर गति को प्राप्त हुए, कल्ला राठौड़ इतिहास में चार हाथों वाले देवता के रूप में प्रसिद्ध हुए। जयमल व फता अकबर के साथ युद्ध करते समय मारे गये तथा फूल कंवर ने जौहर किया। फूल कंवर पत्ता की रानी तथा जयमल की बहन थी। इसे चितौड़गढ़ का तीसरा साका (1568) कहते है। इसके बाद मुगलों का चित्तौड़ पर अधिकार हो गया।

❖ 28 फरवरी 1572 ई. को गोगुन्दा नामक स्थान पर होली के दिन उदयसिंह की मृत्यु हो गयी थी।

☬ महाराणा प्रताप (1572–1597 ई.)

❖ उदयसिंह व जयवन्ता बाई सोनगरा के पुत्र प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 ई. (विक्रम संवत 1597, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष तृतीया) को कटारगढ़, (बादल महल) कुम्भलगढ़ में हुआ। 

❖ महाराणा प्रताप की पत्नी का नाम महारानी अजबदे पंवार था।

❖ महाराणा प्रताप को बचपन में स्थानीय भील समुदाय के लोग 'कीका' नाम से पुकारते थे।

❖ मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह अपनी प्रिय रानी धीर कंवर (भटियाणी) के दबाव में आकर परंपरा के विरुद्ध जाकर अपने बड़े पुत्र महाराणा प्रताप के बजाय अपनी प्रिय रानी धीर कंवर (भटियाणी) के पुत्र जगमाल को मेवाड़ का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। जब 28 फरवरी 1572 को जब महाराणा उदयसिंह की मृत्यु हुई, तब गोगुंदा में जगमाल का राज्याभिषेक करने का प्रयास किया गया। लेकिन मेवाड़ के सामंतों, सरदारों और प्रजा ने छोटे पुत्र जगमाल को राजा बनाने के इस अनुचित निर्णय का कड़ा विरोध किया और ग्वालियर के रामसिंह तंवर और कृष्णदास चुंडावत जैसे प्रमुख सरदारों ने हस्तक्षेप कर जगमाल को गद्दी से हटाकर महाराणा प्रताप का विधिवत राजतिलक किया। इतिहास में पहली बार सामंतों और प्रजा द्वारा राजा के अनुचित फैसले को बदलकर अपनी पसंद के उत्तराधिकारी (महाराणा प्रताप) को गद्दी पर बैठाने की एक शांतिपूर्ण और राजनीतिक क्रांति को 'राजमहलों की क्रांति' के नाम से जाना जाता है।

❖ कुंवर जगमाल सिंह ने मेवाड़ छोड़ दिया और मुगल बादशाह अकबर की सेवा में चला गया, जहाँ उसे जहाजपुर की जागीर मिली। 

❖ महाराणा प्रताप का प्रथम राज्याभिषेक 28 फरवरी 1572 को गोगुंदा में हुआ। कुम्भलगढ़ दुर्ग में विधिवत रूप से दुबारा महाराणा प्रताप का राजतिलक (राज्याभिषेक समारोह) हुआ राणा प्रताप ने 1572 से 1597 ई. तक (25 वर्ष) शासन किया।

❖ महाराणा प्रताप गुहिल राजवंश की सिसोदिया शाखा से संबंधित थे।

❖ महाराणा प्रताप ने भीलों को अपनी सैन्य-व्यवस्था में उच्च स्थानों पर नियुक्त किया था। राणा पूंजा को भील सेना का प्रमुख (दलपति) बनाया गया था।

❖ मेवाड़ के राज चिह्न में एक ओर भील एवं दूसरी ओर राजपूत के अंकन की प्रथा महाराणा प्रताप के समय के काल में प्रारंभ हुई।

❖चक्रपाणि मिश्र मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप के दरबारी पंडित, मित्र, वास्तुकार और प्रमुख वनस्पतिशास्त्री थे। चक्रपाणि मिश्र ने संस्कृत भाषा में कई महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की जैसे विश्ववल्लभ, मुहूर्तमाला, व्यवहारदर्श आदि।

हल्दीघाटी (राजसमंद ) युद्ध – 18 जून 1576 ई.

❖ महाराणा प्रताप के राज्याभिषेक के बाद अकबर ने महाराणा प्रताप को समझाने के लिए चार शिष्टमंडल (दूत) भेजे थे।

➥जलाल खां कोची (नवंबर 1572)

➥मानसिंह कछवाहा (जून 1573)

➥भगवंत दास (अक्टूबर 1573)

➥टोडरमल (दिसंबर 1573)

❖ महाराणा प्रताप ने व्यक्तिगत रूप से अकबर के समक्ष प्रस्तुत होने से स्पष्ट इनकार कर दिया। सभी शांति-प्रयास विफल होने पर युद्ध निश्चित हो गया। अंत में 18 जून 1576 को मेवाड़ के महाराणा प्रताप और मुगल बादशाह अकबर की सेना (अकबर का प्रधान सेनापति राजा मानसिंह ) के बीच हल्दीघाटी (राजसमंद ) का युद्ध लड़ा गया ।

❖ हल्दीघाटी के युद्ध की रणनीति मार्च 1576 ई. मैग्जीन दुर्ग, अजमेर (अकबर के किले) में रची गई थी।

❖ डॉ. गोपीनाथ शर्मा के अनुसार हल्दीघाटी का युद्ध 21 जून 1576 ई. को हुआ था।

❖ हल्दीघाटी राजसमंद जिले में खमनोर एवं बलीचा गांव के मध्य एक दर्रा है। जो राजसमंद और पाली जिलों को जोड़ता है।

❖ हल्दीघाटी के युद्ध में मुगल सम्राट अकबर की सेना का नेतृत्व आमेर के राजा मानसिंह प्रथम ने किया था।

❖ मानसिंह की सेना ने मोलेला गांव के पास ही अपना सैन्य पड़ाव (शिविर) डाला था।

❖ आसफ खां हल्दीघाटी के युद्ध में राजा मानसिंह के साथ मुगल सेना के प्रमुख सह-सेनापति थे ।

❖ हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने स्वयं अपनी सेना का नेतृत्व किया था। 

❖ हल्दीघाटी के युद्ध में मुगल सेना की हरावल का नेतृत्व सैयद हाशिम ने किया था। इनके साथ हरावल में मुहम्मद बादख्शी, रफी, राजा जगन्नाथ, और आसफ खां प्रमुख सेनानायक भी शामिल थे।

❖ महाराणा प्रताप की सेना के अग्रिम भाग (हरावल दस्ते) का नेतृत्व एकमात्र मुस्लिम सेनापति हकीम खां सूरी ने किया था।  

❖ हल्दीघाटी के युद्ध के दौरान महाराणा प्रताप ने अपनी सेना सैन्य पड़ाव (सैन्य शिविर) लोहसिंग गाँव में स्थापित किया था।

❖ हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की भील सेना का नेतृत्त्व राणा पूंजा किया था।

❖ मुगलो की सेना में गजराज,गजमुक्त, रण मदार, मर्दाना आदि हाथी थे। मानसिंह के पास जो हाथी था। उसका नाम मर्दाना था।

❖ हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना के पास दो प्रमुख हाथी लूणा व रामप्रसाद थे। महाराणा प्रताप के उस प्रसिद्ध हाथी का रामप्रसाद को मुगलों ने पकड़ लिया था। और इसका नाम बदलकर 'पीरप्रसाद' रख दिया था।

❖ महाराणा प्रताप का घोड़े का नाम चेतक था, जो काठियावाड़ी नस्ल का था।

❖ बदायूंनी एकमात्र इतिहासकार था, जिसने हल्दीघाटी के युद्ध में भाग लिया था। बदायूंनी ह्ल्दीघाटी युद्ध में अकबर की तरफ से आया था।

❖ युद्ध में राजपूतों की विजय से मुगलों की सेना का मनोबल घटने लगा और मुगल सेना भागने लगी। सेना को भागते हुए देख चन्द्रावल सेना से मिहतर खाँ आगे बढ़ा व ऊँचे स्वर में अकबर के पहुँचने की झूठी घोषणा करते हुए कहा 'बादशाह सलामत स्वयं आ चुके है,  इस घोषणा से स्थिति पलट गई।

❖ हल्दीघाटी के संकरे दर्रे से आगे बढ़ने के बाद खमनोर के मैदानी भाग में भयंकर मार काट से चारो ओर लाशें गिरने लगी और युद्ध इतना भीषण था, कि बड़ी संख्या में सैनिकों के रक्त से यह भूमि लाल हो गई। इसी कारण इस स्थान का नाम "रक्त तलाई" पड़ा। हल्दीघाटी युद्धस्थल पर स्थित यह स्थान शहीदों की स्मृति के रूप में जाना जाता है।

❖ जब महाराणा प्रताप के प्राणों पर संकट आया, तो उनके विश्वस्त सेनापति झाला मानसिंह (झाला बीदा) ने प्रताप का राजचिह्न मुकुट, कवच और छत्र स्वयं धारण कर लिया, ताकि शत्रु का ध्यान भटकाया जा सके। 

❖ चेतक के घायल होने के कारण महाराणा प्रताप को युद्ध भूमि से बाहर जाना पड़ा था। चेतक ने प्रताप को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के कारण युद्धभूमि से कुछ दूर बलीचा गाँव (राजसमंद) में उसकी मृत्यु हो गई। चेतक की छतरी बलीचा (राजसमंद ) में है।

❖ पारंपरिक दृष्टिकोण के अनुसार युद्ध अनिर्णायक रहा  किसी भी पक्ष को निर्णायक विजय नहीं मिली।

❖ हल्दीघाटी के युद्ध को विभिन्न इतिहासकारों ने अलग-अलग नामों से संबोधित किया।

गोगुन्दा का युद्ध- बदायूंनी

खमनौर का युद्ध- अबुल फजल

बादशाह बाग का युद्ध- आदर्शीलाल श्रीवास्तव 

मेवाड़ का थर्मोपोली- कर्नल जेम्स टोड

❖ हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने अरावली की पहाड़ियों में शरण ली और मुगलों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) की नीति अपनाई।

❖ महाराणा प्रताप के बलिदान, त्याग और शौर्य की साक्षी मायरा की गुफा राजस्थान के गोगुन्दा क्षेत्र में स्थित है। हल्दीघाटी युद्ध के दौरान और उसके बाद महाराणा प्रताप ने इस गुफा को अपना खुफिया शस्त्रागार बनाया, जहाँ वे अपने हथियार छुपाकर रखते थे गुफा में प्रवेश करते ही महाराणा प्रताप की कुलदेवी मां हिंगलाज का मंदिर दिखाई देता है, इसी गुफा में महाराणा प्रताप अपने प्रिय घोड़े चेतक को बांधा करते थे।

❖ राणा ने "स्वभूमिध्वंस नीति" अपनाकर मुग़ल थानों के आसपास की भूमि पर किसानों को अन्न उगाने के लिए मना कर दिया । जिससे मुग़ल सैनिक भूखों मरने लगे। 

❖ अकबर ने कुम्भलगढ़ दुर्ग पर तीन बार शहबाज़ ख़ाँ को, चौथी बार अब्दुल रहीम ख़ानेखाना को तथा अन्तिम पाँचवीं बार जगन्नाथ कच्छवाहा को प्रताप के विरुद्ध आक्रमण हेतु भेजा।

❖ 15 अक्टूबर, 1577 को मुगल सम्राट अकबर ने अपने सेनापति शाहबाज खाँ को मेवाड़ के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण  कुम्भलगढ़ दुर्ग पर अधिकार कर महाराणा प्रताप को बंदी बनाने के लिए भेजा था। महाराणा प्रताप अपने विश्वास पात्र राव भाण सोनगरा को कुभलगढ़ दुर्ग सौंपकर स्वयं सुरक्षित स्थान पर चले गये। 3 अप्रैल, 1578 को शाही सेना ने कुम्भलगढ़ दुर्ग पर अधिकार तो कर लिया लेकिन प्रताप को नही पकड़ सके।

❖ चूलिया गाँव (इडर, गुजरात के निकट) में दानवीर भामाशाह की महाराणा प्रताप से मुलाकात हुई थी तब भामाशाह ने अपनी संपूर्ण संचित संपत्ति महाराणा प्रताप को समर्पित कर दी इस समय भामाशाह ने महाराणा प्रताप को 25 लाख रु और 20,000 अशर्फी राणा को दीं थी।

❖ 15 दिसंबर, 1578 को मुगल बादशाह अकबर ने अपने सेनापति शाहबाज खां को महाराणा प्रताप के विरुद्ध दूसरी बार आक्रमण हेतु भेजा। लेकिन वह असफल रहा ।

❖ 15 दिसम्बर, 1578 को शाहबाज असफल होकर 10 जून, 1579 को फतेहपुर सीकरी लौटा ।

❖ 15 नवम्बर, 1579 को शाहबाज पुन: प्रताप पर अधिकार करने के लिए भेजा लेकिन फिर भी असफल रहा। 

❖ 1580 ई. में चौथा सैन्य अभियान "अब्दूर्रहिम खान-ए-खाना" के नेतृत्व में भेजा परंतु अकबर का यह भी अभियान सफल नहीं हुआ और उल्टा महाराणा प्रताप के पुत्र अमरसिंह प्रथम द्वारा अब्दूर्रहिम के साथ आई महिलाओं को बन्दी बना लेता है, लेकिन बाद में महाराणा प्रताप के कहने पर, उन्हें वापस छोड़ दिया जाता है। 

❖ दिवेर का युद्ध 1582 ई. : 1582 ई. में विजयादशमी के दिन महाराणा प्रताप और उनके पुत्र कुंवर अमर सिंह ने अपनी सेना के साथ दिवेर चौकी पर अचानक और भीषण आक्रमण कर दिया। मुगल सेनापति सुल्तान खान इस क्षेत्र में अकबर का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। जब कुंवर अमरसिंह ने अपना भाला सुल्तान पर मारा तो भाला सुल्तान के लोहे के बख्तर को चीरते हुए उसके शरीर में प्रवेश कर पार हो गया। यह देख बाकी मुगल सेना भाग खड़ी हुई और अंतिम रूप से महाराणा प्रताप की जीत हुई। कर्नल जेम्स टॉड ने इस युद्ध को  "मेवाड़ का मैराथन" कहा है। 

❖ अकबर की सेना का महाराणा प्रताप के विरुद्ध अंतिम असफल सैन्य अभियान दिसंबर 1584 ई. को जगन्नाथ कछवाहा के नेतृत्व में भेजा गया था। अकबर ने जगन्नाथ कछवाहा को महाराणा प्रताप को बंदी बनाकर मुगल दरबार में लाने का आदेश दिया था। परन्तु महाराणा प्रताप की कुशल छापामार युद्ध नीति और अरावली की पहाड़ियों की भौगोलिक मजबूती के कारण यह अभियान भी असफल रहा। इस असफलता के बाद अकबर ने अपने जीवनकाल में मेवाड़ के विरुद्ध कोई और सैन्य अभियान नहीं भेजा।

❖ महाराणा प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध से मेवाड़ के माण्डलगढ़ और चित्तौड़ को छोड़कर अधिकांश क्षेत्र पुनः प्राप्त कर लिए।

❖ महाराणा प्रताप ने 1585 अपनी नई राजधानी चावंड में स्थापित की, जहां से उन्होंने शेष जीवन मेवाड़ के पुनर्निर्माण में लगाया । यह मेवाड़ की अंतिम और संकटकालीन राजधानी थी , जहाँ महाराणा प्रताप ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए।

❖ 19 जनवरी 1597 को चावंड में धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय लगी चोट के कारण महाराणा प्रताप का देहांत हुआ। उनका अंतिम संस्कार बांडोली गांव में केजड़ झील के पास किया गया था। उनके पुत्र महाराणा अमर सिंह ने उनकी स्मृति में यहां 8 खंभों की एक सुंदर छतरी का निर्माण करवाया था। 

❖ मारवाड़ के शासक राव चंद्रसेन को महाराणा प्रताप का पथ-प्रदर्शक (या मारवाड़ का प्रताप) कहा जाता है, क्योंकि राव चंद्रसेन ने अपने जीवनकाल में मुगलों (अकबर) की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की।

☬ महाराणा अमर सिंह- प्रथम (1597-1620 ई.)

❖ महाराणा अमर सिंह प्रथम महाराणा प्रताप के सबसे बड़े पुत्र थे। महाराणा प्रताप के निधन के बाद 19 जनवरी 1597 ई. को चावंड में अमर सिंह का राज्याभिषेक हुआ। महाराणा अमर सिंह प्रथम मेवाड़ के 14वें सिसोदिया शासक थे।

    जहांगीर द्वारा मेवाड़ पर कब्ज़ा करने के लिए भेजे गए सैन्य अभियान

❖ 1605 ई. में जहाँगीर ने गद्दी संभालते ही अपने पुत्र शहजादा परवेज नेतृत्व में सेना मेवाड़ भेजी। जिसमे जहाँगीर को कोई सफलता नहीं मिली।

❖ 1608 ई. में महाबत खान ने शाही सेनाओं का नेतृत्व करते हुए मेवाड़ में प्रवेश किया और महाबत खान ने मेवाड़ के मैदानी इलाकों पर आक्रमण किया और काफी तबाही मचाई, लेकिन महाराणा अमर सिंह और उनके सैनिक मेवाड़ की पहाड़ियों और घाटियों में डटे रहे, जिसके कारण मुगलों को कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली ।

❖ 1609 ई. में मुगल सेनापति अब्दुल्ला खान को मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह के खिलाफ सैन्य अभियान का नेतृत्व सौंपा गया। उसने मेवाड़ पर बेहद आक्रामक हमले किए। लेकिन वह भी असफल रहा। 

❖ 1611 ई. में, मिर्ज़ा अज़ीज़ कोका और राजकुमार खुर्रम को मेवाड़ के विरुद्ध शाही सेना का नेतृत्व करने का निर्देश दिया गया, लेकिन उनके आपसी विवादों के कारण अभियान विफल हो गया।

❖ मुगल सम्राट जहांगीर ने 1613 ई. में मेवाड़ अभियान का नेतृत्व अपने पुत्र शहजादा खुर्रम (शाहजहां) को सौंपकर महाराणा अमर सिंह के विरुद्ध भेजा था। खुर्रम ने मेवाड़ के गांवों को बेरहमी से लूटा, फसलों को नष्ट कर दिया और खाद्यान्न आपूर्ति पूरी तरह काट दी।

❖ मुगल-मेवाड़ संधि : लगातार युद्धों और आर्थिक संकट के बाद, सभी सामंतों, दरबारियों एवं कुंवर कर्णसिंह ने महाराणा अमर सिंह प्रथम को मुगुल के साथ शांति बनाने की सलाह दी। मेवाड़ के हित में महाराणा अमर सिंह प्रथम की अनुमति से हरिदास झाला और शुभकरण ने मुगल शहजादे खुर्रम के समक्ष संधि का प्रस्ताव रखा। अंततः 5 फरवरी 1615 को शहजादा खुर्रम और महाराणा अमर सिंह के बीच एक ऐतिहासिक मुगल-मेवाड़ संधि हुई।  

❖ अमरसिंह मुगलों से संधि करने वाला मेवाड़ का प्रथम शासक था। इस संधि पर मुगलों की तरफ से खुर्रम (शाहजहाँ) व मेवाड़ की ओर से अमरसिंह प्रथम ने हस्ताक्षर किए ।

मुग़ल-मेवाड़ संधि की प्रमुख शर्तें

➥ मुगल-मेवाड़ संधि के तहत चित्तौड़गढ़ का किला मेवाड़ को वापस मिलेगा, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं करवाई जाएगी।

➥ मेवाड़ का महाराणा मुगल दरबार में स्वयं उपस्थित नहीं होगा। महाराणा के स्थान पर युवराज कर्णसिंह मुगल दरबार में जाएगा।

➥ मेवाड़ के राजपरिवार पर मुगलों के साथ वैवाहिक संबंध बनाने का कोई दबाव नहीं होगा।

❖ अमर सिंह ने राजसमंद जिले की नौ चौकी नामक स्थान पर राजसमंद झील का निर्माण करवाया था।

❖ आहड़ में मेवाड़ के राणाओं की छतरियों (महासतियों) में राणा अमरसिंह की छतरी पहली छतरी बनी।

☬ महाराणा कर्णसिंह (1620- 1628 ई.)

❖ महाराणा कर्णसिंह के पिता का नाम महाराणा अमर सिंह- I था।

❖ महाराणा कर्णसिंह 26 जनवरी 1620 ई. को मेवाड़ के शासक बने.

❖ कर्णसिंह प्रथम मेवाड़ी राजकुमार थे जो मुगल दरबार में गए थे और सर्वप्रथम मनसबदारी प्राप्त की थी।

❖ महाराणा कर्णसिंह ने उदयपुर की पिछोला झील में जगमंदिर महल का निर्माण शुरू करवाया था। बाद में इनके पुत्र जगतसिंह प्रथम ने इसे पूरा किया।

☬ महाराणा जगत सिंह प्रथम (1628- 1651 ई.)

❖ करणसिंह के बाद उसका पुत्र जगतसिंह प्रथम मेवाड़ का महाराणा बना।

❖ महाराणा जगत सिंह ने उदयपुर में जगन्नाथराय (जगदीश) मंदिर का निर्माण करवाया था।

❖ उदयपुर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर के पास ही धाय मंदिर (नौजू बाई का मंदिर) स्थित है। इस मंदिर का निर्माण महाराणा जगत सिंह ने करवाया था, नौजू बाई महाराणा जगत सिंह की धाय माँ थी।

❖ महाराणा जगत सिंह प्रथम ने उदयपुर की पिछोला झील में महाराणा कर्णसिंह के द्वारा शुरू करवाया गया जगमंदिर महल का निर्माण पूर्ण करवाया था।

❖ मेवाड़ के महाराणा जगत सिंह की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए 'राणे जगपत रा मरस्या' एक प्रसिद्ध राजस्थानी शोक काव्य लिखा गया।

☬ महाराणा राजसिंह (1652- 1680 ई.)

❖ महाराणा राजसिंह जगत सिंह प्रथम के पुत्र थे। महाराणा राजसिंह जगत सिंह प्रथम 10 अक्टूबर 1652 ई मेवाड़ की गद्दी पर बैठे और 1680 ई. तक मेवाड़ पर शासन किया 

❖ महाराणा राजसिंह ने अपने राज्याभिषेक के समय ब्राहमणों को रत्नों का तुलादान किया। यह रत्नों के तुलादान का सम्पूर्ण भारत में अब तक का एकमात्र लिखित उदाहरण है।

❖ महाराणा राज सिंह ने विजय कटकातु उपाधि धारण की थी जिसका अर्थ होता है, “सेनाओं को "सेनाओं को काटने वाला”

❖ महाराणा राजसिंह के राज्याभिषेक के समय मुग़ल शासक शाहजहां था, इसी अवसर पर शाहजहाँ ने उन्हें राणा का खिताब, पाँच हजारी जात और 5 हजार सवारों का मनसब दिया परन्तु राजसिंह ने गद्दी पर बैठते ही चित्तौड़गढ़ के परकोटे का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया, जिससे नाराज होकर शाहजहाँ ने चित्तौड़ दुर्ग के पुनर्निर्माण कार्य को रुकवाने और उसे तुड़वाने के लिए सादुल्ला खां के नेतृत्व में 1654 ई. में मुगल सेना भेजी थी। यह कार्यवाही मेवाड़-मुगल संधि (1615) के उल्लंघन के कारण की गई थी। 

❖ 1657-58 ई. में शाहजहाँ की बीमारी के बाद मुगल साम्राज्य में दारा शिकोह, औरंगजेब, मुराद बख्श, और शुजा के बीच सत्ता के लिए भयंकर संघर्ष हुआ। उत्तराधिकार युद्ध के दौरान औरंगजेब व दारा शिकोह ने मेवाड़ के राणा राजसिंह से सहायता माँगी थी। लेकिन महाराणा राज सिंह ने इस युद्ध में पूरी तरह तटस्थ रहने की नीति अपनाई थी। तटस्थ रहते हुए उन्होंने इस मौके का फायदा उठाया और 'टीकादौड़' (पारंपरिक छापेमारी अभियान) के बहाने कई मुगल चौकियों और क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया था, जब औरंगजेब मुग़ल राज्य का सम्राट बना तो महाराणा राजसिंह को डूंगरपुर, बांसवाड़ा, गयासपुर परगने प्रदान किए थे परन्तु महाराणा और औरंगजेब की मित्रता कई कारणों से कायम न रह सकी। 

❖ औरंगज़ेब किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमती से विवाह करना चाहता था। चारुमती एक मुगल शासक से विवाह कर अपने धर्म और स्वाभिमान से समझौता नहीं करना चाहती थीं। इसलिए चारुमती ने राज सिंह को पत्र लिखा “क्या हंसनी अब बगुले के साथ रहेगी ?”  राज सिंह ने औरंगज़ेब की सेना को रोका और चारुमती से विवाह किया। पत्र मिलते ही महाराणा राजसिंह ने चारुमती की रक्षा करने का संकल्प लिया। इससे औरंगजेब नाराज हो गया। जब औरंगजेब की सेना विवाह रोकने के लिए आगे बढ़ी, तो महाराणा राजसिंह ने अपने सामंत रतन सिंह चूंडावत, (सलुम्बर के सामंत) को औरंगज़ेब की सेना को रोकने के लिए ‘देसुरी की नाल’ पर तैनात किया। रतन सिंह की नई-नई शादी हुई थी। युद्ध में जाते समय उन्होंने अपनी पत्नी हाड़ी रानी (सेलह कंवर/सहज कंवर) से कोई निशानी मांगी। हाड़ी रानी को लगा कि पति का मोह युद्ध में बाधक बनेगा। इसलिए रानी ने अपना सिर काट दिया और थाली में सजाकर निशानी के तौर पर भेज दिया।

❖ जब औरंगजेब ने वल्लभ सम्प्रदाय मूर्तियों को तोड़ने की आज्ञा दी, तब मंदिर के पुजारी (गोंसाई) मूर्ति को लेकर कई महीनों तक सुरक्षा की तलाश में भटकते रहे। औरंगजेब के खौफ और दुश्मनी के डर से कई राजाओं ने उन्हें शरण देने से मना कर दिया तो महाराणा राज सिंह ने औरंगजेब की परवाह न करते हुए उन्हें  को संरक्षण देने की घोषणा की। द्वारकाधीश की मूर्ति मेवाड़ में लाई गई और कांकरोली (राजसमंद) में उसकी प्रतिष्ठा कराई गई। इसी तरह श्रीनाथजी की मूर्ति लेकर दामोदर महाराणा राजसिंह के पास आया। और महाराणा राज सिंह ने सन 1672 ई. में सिहाड़ (वर्तमान नाथद्वारा) में श्रीनाथ जी का मंदिर बनवाया।

❖ राज सिंह ने औरंगज़ेब की ‘जज़िया कर नीति’ व हिन्दु मंदिरों को नष्ट करने की नीति का विरोध किया यह मुगलों को सीधी चुनौती थी।

❖ महाराणा राजसिंह ने जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह की मृत्यु के पश्चात राजकुमार अजीत सिंह और दुर्गादास राठौड़ को मेवाड़ में शरण और केलवा की जागीर प्रदान की थी यह औरंगजेब के साथ मेवाड़ के खुले संघर्ष का एक प्रमुख कूटनीतिक और सामरिक कारण बना था।

❖ राज सिंह ने गोमती नदी का पानी रोककर राजसमंद ( राजसमुद्र झील) झील बनवाई। राज सिंह ने इस झील की नौचौकी पाल पर 25 काले संगमरमर के पत्थरों पर दुनिया का सबसे बड़ा शिलालेख (राज प्रशस्ति) लिखवाया इसके लेखक रणछोड़ भट्ट तैलंग थे महाराणा राजसिंह ने उदयपुर में अंबा माता मंदिर बनवाया।

☬ महाराणा जयसिंह (1680- 1698 ई.)

❖ महाराणा जयसिंह का राज्याभिषेक कुरज गांव में हुआ था। 

❖ महाराणा जयसिंह के द्वारा उदयपुर में  गोमती, झामरी और रूपारेल नदियों के पानी को रोककर जयसमंद झील (ढेबर झील) का निर्माण करवाया गया था। इस झील पर 'बाबा का मगरा' और 'प्यारी' नामक दो बड़े टापू हैं। 

❖ महाराणा जयसिंह ने अपनी परमार रानी कोमला देवी के लिए जयसमंद झील के पास महल का निर्माण करवाया था, जिसे रूठी रानी का महल  कहा जाता है।

❖ महाराणा जयसिंह ने औरंगज़ेब के विद्रोही पुत्र शहज़ादा अकबर (अकबर द्वितीय) को मेवाड़ में शरण दी थी। 

☬ महाराणा अमर सिंह द्वितीय (1698- 1709 ई.)

❖ महाराणा जयसिंह की मृत्यु के पश्चात् 1698 ई. में अमरसिंह द्वितीय मेवाड़ के सिंहासन पर बैठे।

❖ 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके बेटे आजम और मुअज्जम (बहादुर शाह)  दोनो के बीच उत्तराधिकार के लिए संघर्ष हुआ जिसके फलस्वरूप 12 जून 1707 को जजाऊ (आगरा के निकट) के मैदान में युद्ध हुआ और मुअज्जम (बहादुर शाह) जीत गया।

❖ जजाऊ के युद्ध में आमेर के जयसिंह और मारवाड़ के अजीतसिंह ने आजम का साथ दिया और अमरसिंह द्वितीय ने मुअज्जम का साथ दिया था। मुअज्जम ने अजीत सिंह और जयसिंह से उनका राज्य छीन लिया था।

❖ मारवाड़ के अजित सिंह, जयपुर के सवाई जयसिंह तथा मेवाड़ के अमर सिंह द्वितीय के मध्य 1708 में देबारी नामक स्थान पर देबारी समझौता हुआ जिसमे अजीतसिंह को मारवाड़ का राजा, जयसिंह को आमेर का राजा तथा अमर सिंह द्वितीय की पुत्री चंद्रकुंवरी की शादी आमेर के जयसिंह के साथ तय की एवं यह शर्त रखी कि चंद्रकंवर का होने वाला पुत्र जयपुर का अगला शासक होगा। परन्तु जयसिंह की खींची रानी सूरज कवर के ईस्वर सिंह पहले उत्पन्न हुआ बड़ा होने के कारण आमेर का शासक ईश्वर सिंह को बनाना था।

❖ मेवाड़ में सामंतों की सबसे पहली व्यवस्थित सूची महाराणा अमर सिंह-II के समय “अमर शाही रेख” के नाम से बनी। और सामंतों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था, जिन्हें  “सोलह, बत्तीस, गोल सामंत” के नाम से जान जाता था।

☬ महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710- 1734 ई.)

❖ अमरसिंह द्वितीय की मृत्यु के पश्चात् इनका पुत्र संग्रामसिंह द्वितीय 1710 ई. में मेवाड़ का शासक बना।

❖ महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने उदयपुर में सहेलियों की बाड़ी का निर्माण करवाया था।

☬ महाराणा जगतसिंह द्वितीय (1734-1751 ई.)

❖  संग्रामसिंह की मृत्यु के बाद जगतसिंह द्वितीय 1734 ई. में मेवाड़ की गद्दी पर बैठा।

❖ पिछोला झील (उदयपुर) में जग निवास महल/जगत निवास महल का निर्माण मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय ने करवाया था।

❖ हुरडा सम्मेलन : मराठों के बढ़ते हस्तक्षेप को रोकने के लिए मेवाड़ के महाराणा जगत सिंह द्वितीय की अध्यक्षता में 17 जुलाई 1734 को भीलवाड़ा के हुरड़ा नामक स्थान पर हुआ। यह राजस्थान के इतिहास में मराठों के बढ़ते हस्तक्षेप को रोकने के लिए राजपूत राजाओं द्वारा किया गया एक संयुक्त प्रयास था।

➥महाराणा प्रताप सिंह द्वितीय (1751- 1754 ईस्वी) 

➥महाराणा राजसिंह द्वितीय (1754- 1761 ईस्वी)

➥महाराणा अरीसिंह द्वितीय (1761–1773 ईस्वी)

➥हम्मीर सिंह द्वितीय  (1772- 1778 ईस्वी)

☬ महाराणा भीमसिंह (1778- 1828 ई.)

❖ जगतसिंह द्वितीय की मृत्यु के बाद 1778 ई. में उनका पुत्र भीमसिंह मेवाड़ की गद्दी पर बैठा। 

❖ महाराणा भीमसिंह की पुत्री कृष्णा कुमारी की सगाई जोधपुर (मारवाड़) के महाराजा भीम सिंह से हुई, लेकिन विवाह से पहले ही उनका निधन हो गया। इसके बाद मेवाड़ के महाराणा ने कृष्णा कुमारी का रिश्ता जयपुर (आमेर) के महाराजा जगत सिंह द्वितीय से तय कर दिया। जोधपुर के नए राजा मान सिंह ने इसे अपना अपमान माना और दावा किया कि चूंकि रिश्ता जोधपुर घराने में हुआ था, इसलिए कृष्णा कुमारी का विवाह अब उन्हीं से होना चाहिए। जिससे जयपुर और जोधपुर के बीच 1807 नें गिंगोली का युद्ध हुआ। 

❖ मानसिंह ने मराठा सेनापति अमीर खाँ पिंडारी के दबाव में महाराणा भीमसिंह ने कृष्णा कुमारी को विष देकर उनकी हत्या करवा दी। सन् 1810 में मेवाड़ के इतिहास में राजकुमारी कृष्णा कुमारी को जहर देकर मारे जाने की घटना (वर्ष) को सामान्यतः 'मेवाड़ का दूसरा कलंक' कहा जाता है।

❖ कर्नल जेम्स टॉड को मेवाड़ का पहला राजनीतिक एजेंट महाराणा भीम सिंह के शासनकाल में नियुक्त किया गया था।

❖ 1818 ई. में मेवाड़ ने ईस्ट इंडिया कम्पनी के साथ संधि की थी। उस समय महाराणा भीमसिंह शासक थे।

☬ महाराणा जवान सिंह (1828–1838 ई) 

❖ महाराणा जवान सिंह अपने पिता महाराणा भीमसिंह की मृत्यु के बाद 1828 ई. में मेवाड़ के शासक बने थे।

❖ महाराणा जवान सिंह  'ब्रजराज' उपनाम से ब्रज भाषा में भगवान कृष्ण को समर्पित कविताएँ लिखते थे।

☬ महाराणा सरदार सिंह (1838–1842 ई.)

❖ महाराणा सरदार सिंह मेवाड़ के शासक बनने से पहले वे बागोर के ठिकानेदार (महाराज) थे महाराणा जवान सिंह (1828-1838 ई.) की मृत्यु होने के बाद महाराणा सरदार सिंह को मेवाड़ का शासक चुना गया था। 

❖ महाराणा सरदार सिंह के कार्यकाल में भील जनजाति के उपद्रव को दबाने के लिए ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने  1841 में "मेवाड़ भील कोर" का गठन किया गया। मेवाड़ भील कोर का मुख्यालय खेरवाडा (उदयपुर) रखा गया। 

☬ महाराणा स्वरूप सिंह (1842–1861 ई.)

❖ महाराणा सरदार सिंह के दतक पुत्र राणा स्वरूप सिंह 15 जुलाई 1842 मेवाड़ (उदयपुर) राज्य के 70वें सिसोदिया राजपूत शासक बने। 

❖ 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय ये मेवाड़ के महाराणा थे। इन्होंने क्रांतिकारियों के विरुद्ध जाकर अंग्रेजों (कप्तान शावर्स) का पूर्ण समर्थन किया था। नीमच छावनी से भागे हुए 40 अंग्रेज परिवारों को इन्होंने उदयपुर की पिच्छोला झील के ‘जग मंदिर’ में सुरक्षित ठहराया था, और उनकी देखरेख के लिए बेदला के राव बख्तसिंह को नियुक्त किया था।

❖ सन् 1853 ई. में मेवाड़ में खेरवाड़ा के पास भील समाज में प्रचलित ‘डाकण प्रथा’ पर कानूनी रोक लगाई। 

❖ सन 1861 ई. में मेवाड़ में सती प्रथा को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया। जब इनका निधन हुआ, तो इनकी पासवान ‘ऐजाबाई’ इनके साथ सती हुई थी, जो मेवाड़ के इतिहास की अंतिम सती प्रथा की घटना मानी जाती है। 

❖ महाराणा स्वरूप सिंह ने मेवाड़ रियासत में चांदी के 'स्वरूपशाही' सिक्के (जिस पर एक तरफ 'चित्रकूट उदयपुर' और दूसरी तरफ 'दोस्ती लंदन' लिखा था)  चलाए थे।

❖ महाराणा स्वरूप सिंह द्वारा रचित "हक़ीक़त बहिडा" 5 ग्रंथों वाली एक विस्तृत हिंदी पुस्तक है। इसका प्रकाशन महाराणा मेवाड़ ऐतिहासिक प्रकाशन ट्रस्ट द्वारा किया गया है।

☬ शम्भू सिंह (1861–1874 ई.)

❖ महाराणा स्वरूप सिंह के दत्तक पुत्र महाराणा शम्भू सिंह 17 नवंबर 1861 को सिसोदिया राजवंश के 71 वें शासक बने ।

❖ महाराणा शम्भू सिंह के शासनकाल में 'महकमा खास' (सर्वोच्च प्रशासनिक न्यायालय) की स्थापना थी।

❖ महाराणा शंभू सिंह के शासनकाल में 1863 ईस्वी में उदयपुर में 'शंभूरत्न पाठशाला' नाम से पहली कन्या पाठशाला खोली गई थी।

❖ महाराणा शंभू सिंह मेवाड़ के पहले ऐसे शासक थे जिनके निधन (16 जुलाई 1874) पर कोई भी रानी सती नहीं हुई।

❖ महाराणा शंभू सिंह ने सैन्य व्यवस्था में सुधार के लिए 'शंभू पलटन' नाम से एक सुव्यवस्थित सेना की टुकड़ी का गठन किया था।

❖ मेवाड़ के महाराणा शम्भू सिंह (बाद में महाराणा सज्जन सिंह) के दरबारी कवि और इतिहासकार कविराज श्यामलदास थे।

☬ महाराणा सज्जन सिंह (1874–1884 ई.)

❖ सज्जन सिंह बागोर के शक्ति सिंह के पुत्र थे जिनको चचेरे भाई शम्भू सिंह ने अपनाया था, और शम्भू के बाद 1874 में गद्दी पर बैठे थे।

❖ महाराणा सज्जन सिंह ने 10 मार्च 1877 प्रशासन और न्याय व्यवस्था को सुचारू चलाने के लिए  'इजलास खास' का गठन किया गया था। अगस्त 1880 में इसे समाप्त कर दिया गया।

❖ उदयपुर में महाराणा सज्जन सिंह ने 'सज्जनगढ़ पैलेस'/मानसून पैलेस जिसे 'मेवाड़ का मुकुटमणि' भी कहा जाता है, का निर्माण करवाया।

❖ महाराणा सज्जन सिंह ने उदयपुर में प्रसिद्ध 'सज्जन निवास गार्डन' (गुलाब बाग) का निर्माण कार्य करवाया था।

❖ राजपूताना में स्वामी दयानन्द सरस्वती के आगमन महाराणा सज्जन सिंह के समय हुआ। 

❖ श्यामलदास को कविराज की उपाधि देकर वीर विनोद ग्रंथ लिखने के लिए नियुक्त किया। मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहास ग्रंथ 'वीर विनोद' के लेखक कविराजा श्यामलदास महाराणा सज्जन सिंह के दरबारी कवि थे।

☬ महाराणा फतेहसिंह (1884–1930 ई.)

❖ महाराणा सज्जन सिंह के निधन के बाद 23 दिसम्बर 1884 को उनके दत्तक पुत्र फतेहसिंह फतेह सिंह मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। महाराणा फतेहसिंह मेवाड़ के 73वें महाराणा थे।

❖ वर्ष 1687 में महाराणा जय सिंह ने यहाँ देवली नामक गाँव के पास देवली नामक झील का निर्माण करवाया था। बाद में भारी बाढ़ के कारण इसका मिट्टी का बाँध बह गया था।

❖ 1889 में ब्रिटेन के राजकुमार कॉनॉट के आगमन पर महाराणा फतेह सिंह ने यहाँ 'कनॉट बाँध'बनवाया इसके पुनर्निर्माण के बाद इस पूरी झील का नाम बदलकर फतेह सागर झील कर दिया गया।

❖ फतेह प्रकाश महल चित्तौड़गढ(मेवाड) का निर्माण महाराणा फतेह सिंह जी द्वारा करवाया गया ।

❖ वर्ष 1903 में फतेह सिंह, एडवर्ड सप्तम के दरबार में शामिल होने जा रहे थे। तब केसरी सिंह बारहठ ने ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ नामक 13 सोरठे लिखकर उन्हें दिए। चेतावनी रा चुंगटिया पढ़कर उनके मन में राजपूती स्वाभिमान और जग उठा, और वे बिना दरबार में शामिल हुए वापस लौट आए थे।

❖ वर्ष 1911 में जब ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम के सम्मान में दिल्ली दरबार का भव्य आयोजन किया गया था, तो भारत के अधिकांश राजा-महाराजा वहां पहुंचे थे। महाराणा फतेह सिंह ने स्वाभिमान और मेवाड़ की परंपरा का हवाला देते हुए वहां जाने से साफ इनकार कर दिया था।

❖ महाराणा फतेह सिंह इतिहास के एकमात्र ऐसे प्रमुख शासक थे जिन्होंने 1903 और 1911 के दोनों दिल्ली दरबारों में भाग लेने से साफ इनकार कर दिया था।

☬ महाराणा भूपाल सिंह (1930–1955 ई.)

❖ महाराणा भूपाल सिंह मेवाड़ (उदयपुर) के अंतिम सिसोदिया शासक थे।

❖ महाराणा भूपाल सिंह का जन्म 1884 ई. में हुआ था। वे महाराणा फतेह सिंह के पुत्र थे।

❖ 18 अप्रैल 1948 को संयुक्त राजस्थान के राजप्रमुख बने। 1 अप्रैल 1949 से उनका पद 'महाराजप्रमुख' कर दिया गया।

❖ संयुक्त राजस्थान के गठन के बाद वे राजस्थान के प्रथम और एकमात्र 'महाराजप्रमुख' बने और 1955 में अपनी मृत्यु तक इस सम्मानित पद पर रहे।



1.             राजस्थान के नाम का सबसे प्राचीन लिखित प्रमाण या उल्लेख किस शिलालेख में मिलता है ?

बसंतगढ़ शिलालेख (सिरोही) में

2.             रामायण काल में महर्षि वाल्मीकि ने राजस्थान क्षेत्र को क्या नाम दिया था ?

मरुकांतर

3.             राजस्थान के लिए सबसे पहले 'राजपूताना' शब्द का प्रयोग किसने और कब किया था ?

जॉर्ज थॉमस ने सन् 1800 ईस्वी में

4.             जॉर्ज थॉमस ने इस क्षेत्र के लिए 'राजपूताना' शब्द का प्रयोग किया था, इसका लिखित प्रमाण कहाँ मिलता है ?

विलियम फ्रैंकलिन की पुस्तक "मिलिट्री मेमोयर्स ऑफ मिस्टर जॉर्ज थॉमस" में

5.             राजस्थान के लिए सबसे पहले 'राजस्थान', 'रायथान' या 'रजवाड़ा' शब्द का प्रयोग किसने किया ?

कर्नल जेम्स टॉड ने

6.             कर्नल जेम्स टॉड ने किस पुस्तक में इस राज्य का नाम 'राजस्थान' रखा ?

"एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान" में

7.             स्वतंत्रता के बाद इस राज्य को आधिकारिक (संवैधानिक) रूप से 'राजस्थान' नाम कब स्वीकृत किया गया ?

26 जनवरी 1950 को

8.             गोहिल वंश की नीव गुहादित्य ने कब डाली ?

566 ई.

9.             गोहिल वंश की प्रारंभिक राजधानी कौन सी थी ?

नागदा

10.         इतिहास के अनुसार मेवाड़ में गुहिल वंश की नींव रखने वाले या प्रथम संस्थापक किसे माना जाता है?

गुहिल (गुहदित्य)

11.         कर्नल जेम्स टॉड और नैनसी के अनुसार गुहिल वंश की कुल कितनी शाखाएँ थीं ?

24 शाखाएँ

12.         मेवाड़ के शासक स्वयं को किस देवता का दीवान मानते थे ?

भगवान एकलिंग जी (श्री एकलिंग नाथ जी)

13.         किस गांव का भील सरदार अपने अंगूठे के रक्त से मेवाड़ के महाराणा का राजतिलक करता था ?

ऊंदरी

14.         मेवाड़ का प्राचीन नाम क्या था ?

मेदपाट / प्राग्वाट

15.         गुहिलों की सत्ता का प्रारंभिक केंद्र कहां था ?

नागदा

16.         गुहिल वंश का प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र कौन-सा था ?

मेवाड़

17.         मेवाड़ की राजसत्ता की धार्मिक परंपरा में किस देवता का विशेष महत्व रहा ?

एकलिंगजी

18.         मेवाड़ के इतिहास में गुहिल वंश के बाद प्रमुख शासक शाखा के रूप में कौन-सी शाखा प्रसिद्ध हुई ?

सिसोदिया

19.         मेवाड़ में जागीरदार द्वारा अपनी आय का 1/6 (छठा हिस्सा) शासक या प्रशासक को देने की प्रथा को क्या कहा जाता था?

छंटूंद

20.         मेवाड़ में  व्यापारिक वस्तुओं के आयात और निर्यात पर राज्य द्वारा लिया जाने वाला कर या शुल्क  क्या कहलाता था ?

मापा

21.         महासतियों के नाम से जानी जाने वाली मेवाड़ के महाराणाओं की छतरियाँ कहाँ पर स्थित है ?

आहड़

22.         मेवाड़ का गुहिल वंश स्वयं को किस वंश का वंशज मानता है ?

सूर्यवंशी (भगवान श्री राम के वंशज)

23.         मेवाड़ के गुहिल शासकों के कुलदेवता कौन थे ?

एकलिंगजी (भगवान शिव का रूप)

24.         मेवाड़ के गुहिल राजवंश की कुलदेवी कौन थी ?

बाण माता (बायण माता)

25.         ‘जो दृढ़ राखे धर्म को ताहि राखे करतार' यह प्रसिद्ध वाक्य किस राजवंश के राजचिह्न पर अंकित है ?

मेवाड़ के गुहिल

26.         किस इतिहासकार ने मेवाड़ के गुहिल शासकों को ईरान के बादशाह नौशेर खाँ आदिल की संतान बताया है ?

अबुल फजल

27.         कर्नल जेम्स टॉड ने गुहिल वंश की उत्पत्ति किससे बताई ?

वल्लभी के शासक शिलादित्य के वंशज

28.         डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा के अनुसार गुहिलवंश की उत्पत्ति किससे हुई ?

सूर्यवंशी क्षत्रियों से

29.         गुहिल वंश दो शाखाओं में किसके समय विभाजित हुआ ?

रणसिंह

30.         रावल शाखा का अंतिम शासक कौन था ?

रतन सिंह

31.         मेवाड़ राजघराने का प्रमुख राजकीय अन्त्येष्टि स्थल का नाम क्या है ?

महासत्य

32.         13वीं शताब्दी ईस्वी के प्रारम्भ में राजस्थान का सबसे प्रमुख और शक्तिशाली राज्य कौन सा था ?

मेवाड़

33.         गुहिल वंश के वास्तविक संस्थापक व प्रथम प्रतापी शासक कौन था ?

बप्पा रावल

34.         बप्पा रावल ने अपनी शुरुआती राजधानी किसे बनाया था ?

नागदा को

35.         बप्पा रावल किस वंश से संबंधित थे ?

मेवाड़ के गुहिल (गुहिलोत) राजवंश से

36.         बप्पा रावल को 'बप्पा' की उपाधि किसने दी थी ?

हरित ऋषि ने ।

37.         बप्पा रावल ने किस वर्ष चित्तौड़ के किस मौर्य शासक को हराकर उस पर अधिकार किया था ?

मान मोरी (734 ई.)

38.         प्रसिद्ध एकलिंग जी (लकुलीश) मंदिर का निर्माण उदयपुर के पास कैलाशपुरी में किसने करवाया था ?

बप्पा रावल

39.         बप्पा रावल द्वारा चलाए गए शुद्ध सोने के सिक्कों का वजन कितना था?

115 ग्रेन

40.         मेवाड़ के शासकों के आराध्य देव 'एकलिंगजी' (लकुलीश जी) के प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण बप्पा रावल द्वारा किस स्थान पर करवाया गया था ?

कैलाशपुरी

41.         बप्पा रावल को किस ऋषि के आशीर्वाद से उन्हें चित्तौड़ का राज्य मिला था ?

हारीत ऋषि

42.         734 ई. तक राजस्थान में मौर्य वंश का शासक कौन था, जो बाद में बप्पा रावल द्वारा मारा गया था ?

मान मोरी

43.         गुहिल वंश का प्रथम शासक कौन था  जिसने सोने के सिक्के चलाए ?

बप्पा रावल

44.         प्रसिद्ध इतिहासकार गौरीशंकर हीराचंद ओझा के अनुसार बप्पा रावल का वास्तविक नाम क्या था?

कालभोज

45.         बप्पा रावल का वास्तविक या मूल नाम क्या था ?

कालभोज

46.         इतिहासकार सी. वी. वैद्य ने किस गुहिल शासक की तुलना फ्रांसीसी सेनापति चार्ल्स मॉर्टेल से की है?

बप्पा रावल

47.         मेवाड़ राजवंश के संस्थापक कौन थे ?

बप्पा रावल

48.         बप्पा रावल किस विदेशी शक्ति के विरुद्ध संघर्ष से जुड़े हैं ?

अरब शक्ति

49.         बप्पा रावल मेवाड़ का  शासक कब बना

734 ई में

50.         बप्पा रावल ने मेवाड़ पर अधिकार करने के बाद कौन-सी प्रमुख उपाधियाँ धारण की थीं?

हिन्दू सूर्य, राजगुरु और चक्कवे।

51.         रावल अल्लट का प्रसिद्ध उपनाम क्या था?

आलू रावल 

52.         अल्लट ने मेवाड़ की दूसरी राजधानी किसे बनाया था?

आहड़ (उदयपुर)

53.         मेवाड़ में सर्वप्रथम नौकरशाही का गठन किसने किया था ?

रावल अल्लट ने

 

54.         राजस्थान या मेवाड़ के इतिहास का पहला 'अंतर्राष्ट्रीय विवाह' किसने किया था ?

रावल अल्लट ने हूण राजकुमारी 'हरिया देवी' से विवाह किया था

55.         आहड़ में प्रसिद्ध 'वराह मंदिर' (भगवान विष्णु का अवतार) का निर्माण किसने करवाया था ?

रावल अल्लट ने

56.         कौन सा महत्वपूर्ण अभिलेख रावल अल्लट के शासनकाल, उसकी प्रशासनिक स्थिति तथा आहाड़ के जनजीवन और कर व्यवस्था पर प्रकाश डालता है ?

सारणेश्वर (आहाड़) अभिलेख

57.         ‘भूताला का युद्ध’ किसके मध्य लड़ा गया ?

दिल्ली के शासक इल्तुतमिश तथा रावल जैत्रसिंह के मध्य

58.         किस गुहिल शासक ने इल्तुतमिश की सेना को भूताला की लड़ाई में पीछे धकेला था ?

जैत्र सिंह

59.         किस इतिहासकार ने रावल जैत्रसिंह के शासनकाल को 'मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णकाल' कहा है ?

डॉ. दशरथ शर्मा

60.         गुहिल वंश के किस शासक ने चित्तौड़ को मेवाड़ की राजधानी बनाया?

जैत्रसिंह

61.         मेवाड़ के किस शासक ने 'भुताला के युद्ध' में दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश को पराजित किया?

जैत्रसिंह

62.         रावल जैत्रसिंह का प्रमुख संघर्ष दिल्ली सल्तनत के किस सुल्तान से हुआ था?

इल्तुतमिश

63.         किसने मेवाड़ की राजधानी नागदा से चित्तौड़ हस्तांतरित की ?

जैत्रसिंह

64.         कौनसा दिल्ली सुल्तान गुहिल शासक जैत्रसिंह द्वारा पराजित किया गया था ?

इल्तुतमिश

65.         कौनसा दिल्ली सुल्तान गुहिल शासक जैत्रसिंह द्वारा पराजित किया गया था ?

इल्तुतमिश

66.         रावल तेजसिंह के शासन काल में मेवाड़ शैली का सबसे प्राचीन चित्र ‘श्रावण प्रतिक्रम चूर्णि’ का चित्रांकन किसने किया ?

कमलचंद्र

67.         1303 ई. के चित्तौड़ संघर्ष के समय मेवाड़ का शासक कौन था ?

रावल रतनसिंह

68.         1303 ई. में चित्तौड़ पर आक्रमण करने वाला शासक कौन था ?

अलाउद्दीन खिलजी

69.         अलाउद्दीन खिलजी और मेवाड़ वासियों के बीच चित्तौड़गढ़ की घेराबंदी किस वर्ष हुई थी ?

1303

70.         अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ अभियान (1303 ई.) के समय उसके साथ कौन सा इतिहासकार था ?

अमीर खुसरो

 

71.         चित्तौड़गढ़ का प्रथम साका (शाका) किस वर्ष हुआ था ?

1303 ई. में रावल रतन सिंह के शासनकाल में हुआ।

72.         चित्तौड़गढ़ का प्रथम साके में जौहर का नेतृत्व किसने किया था ?

रानी पद्मिनी ने

73.         चित्तौड़गढ़ का प्रथम साके में केसरिया का नेतृत्व किसने किया था ?

गोरा और बादल तथा राजा रतन सिंह

74.         चित्तौडगढ़ के प्रथम साके के समय रतनसिंह के सेनापति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका किसने निभाई थी ?

गोरा-बादल

75.         रावल रतन सिंह के वे दो प्रसिद्ध सेनापति कौन थे जो इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए ?

गोरा और बादल

76.         किस रचना में अमीर खुसरो ने चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का वर्णन किया है ?

खाजाइन-उल-फुतूह

77.         चित्तौड़ पर विजय प्राप्त करने के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने इसका नाम बदलकर क्या रखा था ?

खिज्राबाद

78.         उस व्यक्ति का नाम बताइए, जिसे रतनसिंह ने अपने दरबार से निकाल दिया था तथा बाद में वह अलाउद्दीन खिलजी की शरण में चला गया ?

चेतन राघव

79.         राणा हम्मीर ने चित्तौड़गढ़ पर अधिकार कब किया ?

1326 ई

80.         सिसोदिया वंश का संस्थापक किसे माना जाता है ?

राणा हम्मीर

81.         किस शासक को चित्तौड़ में गुहिल राजवंश की पुनः स्थापना का श्रेय दिया गया ?

राणा हम्मीर

82.         सिसोदिया वंश के पूर्वज कौन  बने थे ?

राणा हम्मीर

83.         राणा हम्मीर ने चित्तौड़गढ़ पर किस सुल्तान के शासनकाल में अधिकार किया था ?

मुहम्मद बिन तुगलक

84.         मेवाड़ के शासकों के लिए 'महाराणा' या 'राणा' उपाधि की शुरुआत किस शासक से हुई ?

राणा हम्मीर से।

85.         कर्नल जेम्स टॉड ने किस शासक को प्रबल हिंदू राजा कहा ?

राणा हमीर

86.         राणा हम्मीर को 'वीर राजा' की उपाधि किस ग्रंथ में दी गई है ?

महाराणा कुंभा द्वारा रचित 'रसिक प्रिया' टीका में।

87.         मेवाड़ का उद्धारक (मुक्तिदाता) किसे कहा जाता है ?

राणा हम्मीर को

 

88.         राणा हम्मीर को 'विषम घाटी पंचानन' (विकट आक्रमणों में सिंह के समान) की उपाधि कहाँ दी गई है?

कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति में।

89.         सिंगोली का युद्ध किनके बीच हुआ ?

राणा हम्मीर और  दिल्ली सल्तनत के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक की सेना 

90.         राणा हम्मीर ने दिल्ली के किस शासक को सिंगोली के युद्ध में पराजित किया ?

मुहम्मद बिन तुगलक की सेना

91.         चित्तौड़गढ़ दुर्ग में 'अन्नपूर्णा माता' (बरवड़ी माता) के मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ?

राणा हम्मीर ने

92.         क्षेत्र सिंह को अन्य किस नाम से जाना जाता है  ?

राणा खेता

93.         क्षेत्र सिंह का शासन काल कितना था ?

1364 से 1382 ईस्वी तक

94.         मेंवाड़-मालवा संघर्ष की शुरुआत किसके शासनकाल में हुई ?

राणा क्षेत्र सिंह (खेता) के शासनकाल में

95.         क्षेत्र सिंह किसका पुत्र था ?

राणा हम्मीर का

96.         मेवाड़-मालवा युद्ध का तात्कालीन कारण क्या था ?

मालवा का महपा पँवार को मेवाड को सौंपने से इंकार

97.         राणा लाखा किस शासक के पुत्र थे ?

राणा क्षेत्रसिंह

98.         राणा लाखा को अन्य किस नाम से जाना जाता था ?

लक्षसिंह

99.         मेवाड़ के किस शासक के समय जावर में चाँदी की खान निकली थी ?

राणा लाखा

100.     राणा लाखा के शासनकाल को मेवाड़ के इतिहास में किस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है ?

राजनीतिक सुदृढ़ीकरण और आर्थिक विकास

101.     राणा लाखा के काल से संबंधित पिछोला झील किस शहर के इतिहास से जुड़ी है ?

उदयपुर

102.     राणा लाखा के समय मेवाड़ की आर्थिक समृद्धि का प्रमुख आधार किस खनिज क्षेत्र को माना जाता है?

जावर

103.     राणा लाखा की पत्नी हंसाबाई किस राजवंश से संबंधित थीं ?

मारवाड़ के राठौड़ राजवंश से

104.     हंसाबाई का विवाह किस मेवाड़ी शासक से हुआ था ?

राणा लाखा

105.     किस राणा ने हंसाबाई से न केवल शादि से इन्कार किया बल्कि उसके पुत्र मोकल के पक्ष में मेवाड़ की गद्दी त्याग दी ?

राणा चूड़ा

106.     चूण्डा ने किसके उत्तराधिकार के समर्थन में अपने अधिकार का त्याग किया था ?

मोकल

107.     उदयपुर की ऐतिहासिक 'पिछोला झील' का निर्माण राणा लाखा के काल में किसके द्वारा करवाया गया था?

पिच्छू या पीछू/छीतर बंजारे द्वारा

108.     कुंवर चूण्डा को मेवाड़ के इतिहास में किस उपनाम से जाना जाता है?

मेवाड़ का भीष्म

109.     महाराणा मोकल किस प्रसिद्ध मेवाड़ी शासक के पिता थे?

राणा कुंभा

110.     राणा मोकल  किसके पुत्र थे?

राणा लाखा और हंसाबाई

111.     राणा लाखा के बाद मेवाड़ का शासक कौन बना?

राणा मोकल

112.     चित्तौड़ के 'समिद्धेस्वर मंदिर' का जीर्णोद्धार मेवाड़ के किस शासक ने करवाया?

महाराणा मोकल

113.     प्रसिद्ध वास्तुकार फना-मना-विशल किसके दरबार में थे –

राणा मोकल

114.     राणा मोकल की हत्या कहाँ की गई थी?

जीलवाड़ा में

115.     राणा कुंभा का शासनकाल सामान्यतः किस अवधि से माना जाता है ?

1433–1468 ई.

116.     वह प्रसिद्ध राजपूत राजा कौन था जिसने राजस्थान में सर्वाधिक दुर्गों का जीर्णोद्धार एवं निर्माण करवाया

महाराणा कुम्भा

117.     कविराजा श्यामलदास के अनुसार महाराणा कुंभा ने कितने दुर्गों का निर्माण करवाया?

32

118.     कुंभलगढ़ दुर्ग का निर्माण किसने कराया था?

महाराणा कुंभा ने

119.     राजस्थान में स्थापत्य कला का जनक कहा जाता है?

राणा कुंभा

120.     किस राजपूत शासक को हिन्दू सुरताण के नाम से जाना जाता हैं ?

महाराणा कुंभा को

121.     राणा कुंभा को संगीत एवं नाट्यशास्त्र की जानकारी होने के कारण कौनसी उपाधि दी गई थी।?

अभिनव भरताचार्य

122.     स्थापत्य कला का जनक होने के कारण राणा कुम्भा को किस नाम से जाना जाता है –

हालगुरू

123.     संगीतराज नामक कृति किस राजपूत शासक की रचना है

महाराणा कुम्भा

124.     गुहिल राजवंश में से किसने चण्डीशतक, गीत गोविन्द और संगीत रत्नाकर पर टीकाएं लिखी थी?

महाराणा कुम्भा

125.     महाराणा कुंभा के समय मालवा का सुल्तान कौन था ?

महमूद खिलजी

126.     सारंगपुर का युद्ध कब लड़ा गया था ?

1437 ई.

127.     1437 ई. में 'सारंगपुर के युद्ध' में  किनके बीच हुआ ?

महाराणा कुंभा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम के बीच

128.     राणा कुंभा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी को किस युद्ध में बंदी बनाया था ?

'सारंगपुर के युद्ध' में

129.     चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित 'विजय स्तंभ' का निर्माण किसने करवाया ?

महाराणा कुंभा

130.     विजय स्तंभ किस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में बनवाया गया ?

सारंगपुर के युद्ध में मालवा विजय की स्मृति में

131.     आवल-बावल की संधि कब हुई थी?

1453 ई

132.     आवल-बावल की संधि किन शासकों के बीच हुई थी?

मेवाड़ के महाराणा कुंभा और मारवाड़ के राव जोधा के मध्य 

133.     आवल-बावल की संधि में मध्यस्थता (समझौता कराने) की भूमिका किसने निभाई थी?

महाराणा कुंभा की दादी और राव जोधा की बुआ हंसाबाई ने

134.     आवल-बावल की संधि का मुख्य उद्देश्य क्या था ?

मेवाड़ और मारवाड़ के बीच सीमा का निर्धारण

135.     आवल-बावल संधि के तहत दोनों राज्यों की सीमा का केंद्र किसे माना गया ?

सोजत (पाली) को

136.     1456 ई. में चंपानेर की संधि किनके मध्य हुई ?

गुजरात राजा कुतुबद्दीन शाह व मालवा के राजा महमूद खिलजी के बीच

137.     बदनौर का युद्ध कब और किनके बीच लड़ा गया था ?

1457 ईस्वी में महाराणा कुंभा और महमूद खिलजी (मालवा) व कुतुबुद्दीन शाह (गुजरात) की संयुक्त सेना के बीच

138.     श्रृंगार चंवरी मंदिर कहाँ स्थित है ?

चित्तौड़गढ़ किले (दुर्ग)

139.     श्रृंगार चंवरीमंदिर किस तीर्थंकर को समर्पित है ?

जैन तीर्थंकर शांतिनाथ जी को

140.     श्रृंगार चंवरी मंदिर का निर्माण या जीर्णोद्धार किसने करवाया था ?

महाराणा कुंभा के कोषाध्यक्ष भंडारी वेलका (बेला)

141.     श्रृंगार चंवरीमंदिर का नाम 'श्रृंगार चंवरी' क्यों पड़ा ?

यहाँ महाराणा कुंभा की पुत्री रमाबाई का विवाह हुआ था उनकी चवरी यहाँ स्थित थी

142.     राणा कुंभा की हत्या किसने की ?

ऊदा ने

143.     राणा कुम्भा की हत्या कहाँ  हुई ?

कुम्भलगढ़ में

144.     महाराणा कुंभा ने कौनसे ग्राम एकलिंगजी के मंदिर की पूजा एवं व्यवस्था हेतु प्रदान किये थे ?

नागदा, कालोडा, मालाखेड़ा और भीमाना

145.     मेवाड़ की किस घटना को मेवाड़ का प्रथम कलंक कहा जाता है ?

ऊदा द्वारा कुम्भा की हत्या करना

146.     मेवाड़ का प्रथम पितृहन्ता किसे कहा जाता है ?

उदा ने

147.     महाराणा रायमल मेवाड़ के किस प्रसिद्ध शासक के पुत्र थे, जिनके बाद उन्होंने 1473 ईस्वी में मेवाड़ की गद्दी संभाली ?

महाराणा कुम्भा

148.     मेवाड़ के रायमल के किस पुत्र को 'उड़ना राजकुमार' (उड़वा राजकुमार) कहा जाता है ?

कुंवर पृथ्वीराज सिसोदिया को

149.     महाराणा रायमल की किस रानी ने घोसुंडी की बावड़ी का निर्माण करवाया था ?

रायमल की प्रधान रानी शृंगार देवी ने

150.     महाराणा रायमल की मृत्यु के बाद मेवाड़ का उत्तराधिकारी कौन बना ?

राणा सांगा (संग्राम सिंह) 1509 ई. में

151.     महाराणा सांगा का मूल नाम क्या था ?

संग्राम सिंह

152.     राणा सांगा किस वंश के प्रमुख शासक थे ?

गुहिल राजवंश

153.     मीरां का विवाह मेवाड़ के किस महाराणा के साथ हुआ था ?

राणा भोजराज (महाराणा सांगा का बेटा)

154.     राणा सांगा के मेवाड़ के शासक बनने के समय दिल्ली सल्तनत का सुल्तान कौन था ?

सिकंदर लोदी

155.     राणा सांगा (महाराणा संग्राम सिंह) की राजधानी थी ?

चित्तौड़गढ़ (चित्तौड़)

156.     खातौली (कोटा) का युद्ध कब  व किसके बीच लड़ा गया था ?

1517 ई. में महाराणा सांगा तथा दिल्ली के शासक इब्राहिम लोदी के बीच

157.     राण सांगा ने 1518 में खातौली के युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराया, खतौली किस जिले में स्थित है ?

कोटा (खातोली इससे पहले बूंदी रियासत)

158.     खतौली(1517 ई.) की लड़ाई में राणासांगा ने किसको पराजित किया था ?

इब्राहीम लोदी

159.     बाड़ी (धौलपुर) का युद्ध कब  व किसके बीच हुआ था ?

1518 ई. में मेवाड़ के महाराणा सांगा और दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच

160.     राजस्थान के उस शक्तिशाली राजा का नाम बताइए, जिसने उत्तरी भारत पर शासन किया और जिसकी सेना ने बाड़ी (धौलपुर) के युद्ध में दिल्ली के इब्राहिम लोदी की सेना को पराजित किया था?

राणा सांगा

161.     राणा सांगा के समय मालवा का शासक कौन था ?

महमूद खिलजी द्वितीय

162.     गागरोन का युद्ध कब और किसके बीच हुआ था ?

1519 ई. महाराणा सांगा व मालवा के शासक  महमूद खिलजी II के बीच

163.     कौन से राजपूत सरदार खानवा के युद्ध में बाबर के विरूद्ध राणा सांगा के पक्ष में लड़े ?

मालदेव, मेदिनी राय, कल्याणमल, रायमल राठौड़, राजा भारमल, वीरमदेव मेड़तिया

164.     बयाना का युद्ध कब हुआ ?

16 फरवरी 1527 ई.

165.     खानवा का युद्ध कबव किसके बीच हुआ ?

1527 ई महाराणा सांगा और बाबर के बीच

166.     खानवा के युद्ध में किसने राणा सांगा का पक्ष बदल कर बाबर का साथ दिया ?

सलहदी तंवर व खानजादा

167.     खानवा युद्ध से पूर्व बाबर ने किस हिंदू राजा के माध्यम से राणा सांगा को शांति समझौते का प्रस्ताव भेजा ?

रायसेन के सलहदी तंवर के माध्यम से

168.     खानवा में बाबर के विरुद्ध सांगा की सहायता के लिए किसके नेतृत्व में मारवाड़ी सेना भेजी गयी थी ?

मालदेव

169.     खानवा के युद्ध में किन मुस्लिम योद्धाओं ने बाबर के विरूद्ध महाराणा सांगा के पक्ष में भाग लिया था?

महमूद लोदी व हसन खां मेवाती

170.     खानवा के युद्ध में राणा सांगा के घायल होने पर उनका राज-चिन्ह धारण करके युद्ध का नेतृत्व किसने संभाला था ?

झाला अज्जा

171.     राजपूकालीन एक प्राचीन परम्परा पाती-पेरवन को किस शासक ने निभाया ?

राणा सांगा

172.     घायल महाराणा सांगा को खानवा के युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बसवा किसने पहुँचाया ?

पृथ्वीराज सिंह प्रथम कछवाहा

173.     राणा साँगा की मृत्यु कब हुई ?

30 जनवरी, 1528

174.     महाराणा सांगा के मृत शरीर का दाह संस्कार किस स्थान पर किया गया था ?

मांडलगढ़

175.     महाराणा सांगा की समाधि/छतरी कहाँ पर स्थित है ?

मांडलगढ़

176.     वह शासक कौनसा है, जिसे कर्नल टाड ने सैनिक भग्नावशेष की संज्ञा दी है ?

राणा सांगा(संग्राम सिंह)

 

177.     मेवाड़ के इतिहास में 'हिन्दूपत' नाम से कौन प्रसिद्ध हुआ ?

राणा साँगा

178.     रावत जग्गा एवं रावत बाघ किस शासक के सरदार थे ?

राणा सांगा

179.     राणा सांगा ने कब से कब तक शासन किया ?

1509 से 1528 ई.

180.     सांगा की मृत्यु के बाद कौन मेवाड़ का शासक बना ?

राणा रतन सिंह

181.     राणा रतन सिंह की मृत्यु के पश्चात् मेवाड़ का शासक कौन बना ?

राणा विक्रमादित्य

182.     राणा विक्रमादित्य मेवाड़ के शासक कब बने थे ?

1531 ईस्वी में

183.     महाराणा विक्रमादित्य किसके पुत्र थे ?

महाराणा सांगा और हाड़ी रानी कर्मावती के पुत्र थे

184.     महाराणा विक्रमादित्य की संरक्षिका कौन थी ?

कर्मावती

185.     विक्रमादित्य के शासनकाल में गुजरात के किस सुल्तान ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया था ?

बहादुर शाह ने

186.     विक्रमादित्य का प्रसिद्ध कृष्ण भक्त कवयित्री मीराबाई से क्या संबंध था ?

मीराबाई के देवर

187.     विक्रमादित्य के शासनकाल में गुजरात के किस सुल्तान ने मेवाड़ पर दो बार (1533 और 1534-35 ई.) आक्रमण किया था

गुजरात के शासक बहादुर शाह ने।

188.     1535 ई. में गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह के चित्तौड़ पर आक्रमण के समय रानी कर्णावती ने किसको सहायता हेतु राखी भेजी

हुमायूँ

189.     चित्तौड़ का दूसरा साका (जौहर) कब और किसके शासनकाल में हुआ था ?

1535 ई. में महाराणा विक्रमादित्य के शासनकाल में

190.     चित्तौड़ के द्वितीय साका में किस रानी ने जौहर किया था ?

रानी कर्मावती ने

191.     चित्तौड़ के दूसरे साके के समय राजपूत सेना का नेतृत्व (केसरिया) किसने किया था ?

प्रतापगढ़ के रावत बाघ सिंह (देवलिया) ने

192.     बहादुर शाह के आक्रमण के समय महाराणा विक्रमादित्य और उनके छोटे भाई उदयसिंह को सुरक्षा के लिए कहाँ भेजा गया था?

बूंदी

 

193.     चित्तौड़ पर बहादुर शाह के आक्रमण के दौरान किले की रक्षा का भार किसे सौंपा गया था ?

देवलिया (प्रतापगढ़) के ठाकुर बाघ सिंह को

194.     महाराणा विक्रमादित्य की हत्या किसने और कब की थी ?

राणा सांगा के भाई पृथ्वीराज के दासी-पुत्र बनवीर ने 1536 ई. में

195.     मेवाड़ के किस शासक को शिशु अवस्था में पन्ना धाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर बचाया ?

महाराणा उदयसिंह

196.     उदय सिंह के प्राणों की रक्षा के लिए किस महान धाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान दिया था ?

पन्ना धाय

197.     उदय सिंह के साथ चित्तौड़ छोड़ने के पश्चात् पन्ना को किस स्थान पर आश्रय प्राप्त हुआ ?

कुंभलगढ़

198.     महाराणा उदय सिंह ने किस ऐतिहासिक युद्ध में बनवीर को पराजित कर चित्तौड़ की गद्दी पर पुनः अधिकार किया था ?

मावली का युद्ध (1540 ई.)

199.     उदयपुर की स्थापना कब और किसके द्वारा की गई थी ?

1559, महाराणा उदय सिंह द्वितीय

200.     उदयसागर झील का निर्माण किसने करवाया था ?

महाराणा उदयसिंह

201.     उदयपुर को मेवाड़ की प्रमुख राजधानी के रूप में विकसित करने वाला शासक कौन था ?

महाराणा उदयसिंह द्वितीय

202.     मेवाड़ के किस महाराणा ने मालवा के शासक बाज बहादुर को शरण प्रदान की थी ?

महाराणा उदय सिंह

203.     अकबर ने जब 1567 ई. में चित्तौड़ पर आक्रमण किया उस समय मेवाड़ मेवाड़ का महाराणा कौन था?

उदयसिंह

204.     महाराणा उदयसिंह ने किले की रक्षा का भार किन दो सेनापतियों को सौंपा था ?

जयमल राठौड़ और पत्ता (फत्ता) सिसोदिया।

205.     जयमल राठौड़ एवं पत्ता सिसोदिया नामक वीरों का संबंध इतिहास प्रसिद्ध किस युद्ध से है ?

चित्तोड़गढ़ का युद्ध

206.     अकबर की बन्दूक का नाम क्या था, जिससे अकबर ने चित्तोड़ दुर्ग रक्षक जयमल को घायल किया ?

संग्राम

207.     अकबर के विरूद्ध चित्तौड़गढ़ आक्रमण (1567-68 ई.स.) के समय कौन से लोक देवता युद्ध करते हुए मारे गये ?

वीर कल्ला जी

208.     तीसरे साके के समय चित्तौड़गढ़ (मेवाड़) के शासक कौन थे ?

महाराणा उदयसिंह द्वितीय

209.     चित्तौड़गढ़ का तीसरा साका किस वर्ष हुआ था?

1568 ईस्वी

210.     चित्तौड़गढ़ के तीसरे साके में  जौहर का नेतृत्व किसने किया ?

राणी फूल कंवर

211.     अकबर ने चित्तौड़ के दुर्ग पर अधिकार कब किया ?

25 फरवरी, 1568 ई.

212.     महाराणा प्रताप की माता व पता का नाम क्या था ?

जयवंता बाई व उदयसिंह

213.     महाराणा प्रताप का जन्म किस वर्ष में हुआ था ?

9 मई 1540 ई.

214.     महाराणा प्रताप का जन्म कहाँ हुआ था ?

कटारगढ़ (बादल महल) कुम्भलगढ़ में

215.     महाराणा प्रताप को उनके बचपन में किस नाम से पुकारा जाता था ?

कीका

216.     महाराणा प्रताप को 'कीका' नाम किसने दिया था ?

स्थानीय भीलों द्वारा

217.     महाराणा प्रताप किस राजवंश की सिसोदिया शाखा से संबंधित थे ?

गुहिल

218.     मेवाड़ के राज चिह्न में एक ओर भील एवं दूसरी ओर राजपूत के अंकन की प्रथा किस मेवाड़ शासक के काल में प्रारंभ हुई?

महाराणा प्रताप के समय

219.     उदयसिंह ने प्रताप के स्थान पर किसे अपना उत्तराधिकारी चुना था, जिसे हटाकर प्रताप शासक बने ?

जगमाल सिंह को

220.     महाराणा प्रताप के किस सौतेले भाई को अकबर ने जहाजपुर की जागीर प्रदान की थी ?

जगमाल सिंह

221.     महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था ?

गोगुन्दा

222.     महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक किस वर्ष हुआ ?

28 फरवरी 1572 ई.

223.     किसके राज्याभिषेक को ‘राजमहलों की क्रांति’ के नाम से जाना जाता है ?

महाराणा प्रताप

224.     किस शासक ने भीलों को अपनी सैन्य-व्यवस्था में उच्च स्थानों पर नियुक्त किया ?

महाराणा प्रताप

225.     महाराणा प्रताप के दरबारी पंडित जिसने ‘मुहुर्तमाला’ ग्रन्थ की रचना की, वह कौन था ?

चक्रपाणि मिश्र

226.     महाराणा प्रताप ने कितने वर्षो तक शासन किया ?

25 वर्ष (1572 ई. से 1597 ई. तक )

227.     अकबर ने महाराणा प्रताप को समझाने के लिए कितने शिष्टमंडल (दूत) भेजे थे ?

चार शिष्टमंडल

228.     अकबर द्वारा राणा प्रताप के पास भेजे गए दूतों का सही क्रम क्या  है ?

जलाल खां, मानसिंह, भगवंतदास, टोडरमल

229.     अकबर ने महाराणा प्रताप से संधि के लिए सबसे पहले किसे दूत बनाकर भेजा था ?

जलाल खां कोरची (नवंबर 1572 में)

230.     अकबर ने किस राजपूत शासक को महाराणा प्रताप को समझाने के लिए दूसरा दूत बनाकर भेजा था ?

मानसिंह को (जून 1573)

231.     अकबर द्वारा महाराणा प्रताप से मैत्री स्थापित करने के लिए तृतीय दूत बनाकर किसे भेजा गया ?

भगवंत दास (अक्टूबर 1573)

232.     अकबर ने महाराणा प्रताप से संधि के लिए अंतिम बार किसे दूत बनाकर भेजा था ?

टोडरमल (दिसंबर 1573)

233.     अकबर ने हल्दीघाटी के युद्ध  की व्यूह रचना कहाँ रची थी ?

अजमेर में स्थित मैग्जीन दुर्ग (अकबर का किला ) में

234.     हल्दीघाटी का युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था ?

18 जून 1576  ई. को

235.     हल्दीघाटी का युद्ध किन-किन के बीच हुआ था ?

मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर के सेनापति मानसिंह के बीच

236.     हल्दीघाटी ऐतिहासिक स्थान किस जिले में स्थित है ?

राजसमंद जिले में

237.     हल्दीघाटी दर्रा किन दो गांवों के बीच स्थित है ?

खमनोर-बलीचा

238.     हल्दीघाटी के युद्ध में मुगल सैनिकों (अकबर का सेनापति) का नेतृत्व किसने किया था ?

मानसिंह प्रथम

239.     हल्दीघाटी के युद्ध में मुग़ल सेना के चन्द्रावल का नेतृत्सेव किसने किया 

मिहतर खाँ

240.     हल्दीघाटी युद्ध के दौरान मानसिंह की सेना ने अपना सैन्य पड़ाव (शिविर) कहाँ डाला था ?

मोलेला गांव के पास

241.     महाराणा प्रताप की सेना के हरावल (अग्रिम दस्ते) का नेतृत्व किसने किया था ?

हकीम खान सूरी

242.     हल्दीघाटी के युद्ध (1576 ई.) में मुगल सेना की हरावल का नेतृत्व किसने किया था

सैयद हाशिम ने

243.     हल्दीघाटी के युद्ध के दौरान महाराणा प्रताप ने अपनी सेना सैन्य पड़ाव (सैन्य शिविर) कहाँ डाला था

लोहसिंग/लोसिंग गाँव में

244.     हल्दीघाटी युद्ध के समय मेवाड़ सेना में शामिल एकमात्र मुस्लिम/अफगान सेनापति कौन थे ?

हकीम खां सूरी

245.     हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की भील सेना का नेतृत्त्व किसने किया था ?

राणा पूंजा

246.     हल्दीघाटी के युद्ध में मुगलों  के सैनिकों के साथ किन हाथियों ने वीरता दिखाई ?

गजमुक्त, गजराज, रण मदार, मर्दाना

247.     हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा के सैनिकों के साथ किन हाथियों ने वीरता दिखाई ?

लूणा व रामप्रसाद

248.     महाराणा प्रताप के उस प्रसिद्ध हाथी का क्या नाम था जिसे मुगलों ने पकड़ लिया था ?

रामप्रसाद (मुगलों ने इसका नाम बदलकर 'पीरप्रसाद' रख दिया था)।

249.     हल्दीघाटी युद्ध  में मानसिंह के हाथी का नाम था ?

मर्दाना

250.     महाराणा प्रताप के प्रसिद्ध घोड़े का नाम क्या था ?

चेतक (काठियावाड़ी)

251.     एकमात्र इतिहासकार कौन था जिसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की तरफ से भाग लिया था ?

बदायूंनी

252.     युद्ध के दौरान गंभीर रूप से घायल होने पर महाराणा प्रताप को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किसने उनका राजमुकुट धारण किया और वीरगति को प्राप्त हुए ?

झाला मानसिंह (झाला बीदा)

253.     किस मुगल सेनिक ने हल्दी घाटी के युद्ध में अकबर के आने की झुठी सुचना दी थी ?

मिहतर खाँ ने

254.     हल्दीघाटी युद्धस्थल पर स्थित वह स्थान जो शहीदों की स्मृति में जाना जाता है, क्या कहलाता है ?

रक्त तलाई

255.     महाराणा प्रताप के प्रसिद्ध घोड़े चेतक की मृत्यु हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात किस स्थान पर नाला पार करते समय हुई थी ?

बलिचा नाला

256.     प्रताप के घोड़े चेतक की छतरी कहाँ बनी हुई है ?

बलीचा (राजसमंद)

257.     हल्दीघाटी के युद्ध को अबुल फजल ने क्या कहा था ?

खमनौर का युद्ध

258.     कर्नल जेम्स टॉड ने हल्दीघाटी के युद्ध को क्या नाम दिया है ?

मेवाड़ की थर्मोपल्ली

259.     बदायूंनी ने 'मुंतखाब-उल-तवारीख' में हल्दीघाटी के  युद्ध को क्या कहा है ?

गोगुंदा का युद्ध

260.     आदर्शीलाल श्रीवास्तव ने हल्दीघाटी के युद्ध को क्या नाम दिया है ?

बादशाह बाग का युद्ध

261.     हल्दीघाटी युद्ध का सामान्यतः स्वीकृत परिणाम क्या माना जाता है ?

अनिर्णायक

262.     मेवाड़ के किस शासक ने स्वभूमिध्वंस की नीति का अनुसरण किया ?

महाराणा प्रताप ने

263.     मेवाड़ के आर्थिक संकट के समय महाराणा प्रताप की आर्थिक सहायता किसने की ?

भामाशाह

 

264.     भामाशाह वित्तीय सहायता देने हेतु किस स्थान पर राणा प्रताप से मिले थे ?

चूलिया

265.     अकबर द्वारा 1580 ई. में महाराणा प्रताप के विरूद्ध भेजे गए सैन्य अभियान का नेतृत्व किसने किया ?

अब्दुर्रहीम खान खाना

266.     दिवेर का युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था ?

1582

267.     दिवेर का युद्ध किनके के बीच लड़ा गया था ?

मेवाड़ के महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर की सेनापति सुल्तान खान के बीच

268.     किस मुगल सेनानायक को दिवेर के युद्ध में महाराणा प्रताप ने परास्त किया था ?

सुल्तान खान

269.     कर्नल जेम्स टॉड ने किस युद्ध को 'मेवाड़ का मेराथन' कहा ?

दिवेर के युद्ध

270.     अकबर की सेना का महाराणा प्रताप के विरूद्ध अंतिम असफल अभियान कब हुआ था ?

दिसंबर, 1584 ई.

271.     अकबर द्वारा दिसंबर, 1584 ई. में महाराणा प्रताप के विरूद्ध भेजे गए अंतिम  सैन्य अभियान का नेतृत्व किसने किया ?

जगन्नाथ कछवाहा

272.     हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात्, महाराणा प्रताप ने मेवाड़ के मुगलों द्वारा जीते गए प्रदेशों में से किनकों छोड़कर सभी पर अधिकार करने में सफलता प्राप्त कर ली थी ?

माण्डलगढ़ और चित्तौड़

273.     महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी/ दिवेर युद्ध के 1585 ई. के बाद अपनी नई राजधानी कहां स्थापित की ?

चावंड

274.     महाराणा प्रताप ने चावंड को राजधानी कब बनाया ?

1585 ई.

275.     चावण्ड, महाराणा प्रताप की कितने वर्षों तक राजधानी रही ?

12 वर्ष (1585 से 1597 ई. तक)

276.     महाराणा प्रताप का निधन किस वर्ष और स्थान पर हुआ ?

19 जनवरी 1597, चावंड

277.     महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद उनका छतरी  कहाँ बनी गई ?

बांडोली (उदयपुर ) में

278.     हल्दीघाटी युद्ध के दौरान और उसके बाद महाराणा प्रताप ने अपना खुफिया शस्त्रागार कहाँ बनाया ? 

मायरा की गुफा में

279.     महाराणा प्रताप का पथ-प्रदर्शक (या मारवाड़ का प्रताप) किसे कहा जाता है ?

राव चंद्रसेन को

280.     महाराणा प्रताप ने रामा महासहानी को प्रधान के पद से हटाकर उसके स्थान पर किसे नियुक्त किया गया ?

भामाशाह कावड़िया

 

281.     महाराणा प्रताप की मृत्यु के पश्चात अमर सिंह प्रथम किस वर्ष मेवाड़ के सिंहासन पर बैठे?

1597 ई.

282.     अमर सिंह का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था

चावंड में

283.     मुगल मेवाड़ संधि 1615 किन-किन के मध्य हुई।

जहाँगीर एवं अमरसिंह I

284.     वर्ष 1615 की ऐतिहासिक मुगल-मेवाड़ संधि के दौरान महाराणा अमर सिंह की ओर से मुगलों के समक्ष वार्ता हेतु मुख्य दूत या शिष्टमंडल में कौन शामिल थे ?

हरिदास झाला और शुभकरण

285.     मुगलों की अधीनता स्वीकार करने वाला प्रथम मेवाड़ शासक था ?

अमरसिंह प्रथम

286.     आहड़ की महासतियों में सबसे पहली छतरी किसकी है ?

अमरसिंह प्रथम

287.     किस शासक की प्रथम छतरी आहड़ में बनी जिसके बाद आहड़ सिसौदिया वंश के शासकों का शाही श्मशान घाट कहलाया?

राणा अमरसिंह

288.     महाराणा अमर सिंह प्रथम की मृत्यु कहाँ हुई  ?

आहड़ में

289.     किस मेवाड़ शासक के शासनकाल में शाहजहाँ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जियारत करने अजमेर आया था

महाराणा जगत सिंह- I

290.     किस शासक की मृत्यु पर विलाप के लिए 'राणे जगपत रा मरस्या' लिखा गया था ?

महाराणा जगत सिंह

291.     उदयपुर के प्रसिद्ध जगदीश मंदिर (जगन्नाथराय मंदिर) का निर्माण किस शासक ने करवाया था ?

जगतसिंह प्रथम

292.     नौजू बाई के मंदिर का निर्माण किसने करवाया था ?

महाराणा जगत सिंह प्रथम

293.     नौजू बाई कौन थीं, जिनके नाम पर महाराणा ने इस मंदिर का निर्माण कराया ?

महाराणा जगत सिंह की धाय माँ

294.     महाराणा राजसिंह प्रथम का शासनकाल क्या था?

1652 से 1680 ई.

295.     महाराणा राजसिंह का राज्याभिषेक कब हुआ?

10 अक्टूबर 1652 ई. को

296.     कौन-सा शासक महाराणा जगतसिंह के पश्चात् मेवाड़ की गद्दी पर बैठा

महाराणा राजसिंह

297.     महाराणा राजसिंह का राज्याभिषेक के समय मुग़ल शासक कौन था

शाहजहां

298.     शाहजहाँ ने चित्तौड़ दुर्ग के पुनर्निर्माण कार्य को रुकवाने और उसे तुड़वाने के लिए किसे भेजा ?

सादुल्ला खाँ को

299.     महाराणा राजसिंह ने कौन सी सैन्य उपाधि धारण की थी?

'विजय कटकातु' (सेनाओं को जीतने वाला)

300.     उत्तराधिकार युद्ध के दौरान किन मुगल शहजादों ने मेवाड़ के राणा राजसिंह से सहायता माँगी थी  ?

औरंगजेब व दारा शिकोह

301.     औरंगज़ेब ने महाराणा राजसिंह को कौनसे परगने प्रदान किए थे ?

डूंगरपुर, बांसवाड़ा, गयासपुर

302.     किस राजपूत शासक द्वारा औरंगजेब के विरूद्ध विद्रोह किया गया था

महाराणा राजसिंह

303.     किसने मुगल मेवाड़ संधि का सर्वप्रथम उल्लंघन किया ?

राज सिंह

304.     चारुमती विवाह के समय औरंगजेब की सेना को रोकने वाले सलूम्बर के किस सामंत की नई नवेली रानी (हाड़ी रानी/सहिल कंवर) ने अपना सिर काटकर दे दिया था ?

रावत रतन सिंह चूंडावत

305.     मेवाड़ के महाराणा राजसिंह के द्वारा किस राजकुमारी के साथ विवाह करने के कारण औरंगजेब उनसे नाराज था ?

चारूमती

306.     अपना सिर काटकर देने वाली हाड़ी रानी का नाम क्या था ?

रानी सहल कंवर

307.     औरंगज़ेब की ‘जज़िया कर नीति’ एवं हिन्दु मंदिरों को नष्ट करने की नीति का विरोध किस शासक ने किया ?

राज सिंह प्रथम ने

308.     किसके शासनकाल में औरंगजेब ने मेवाड़ राज्य से जजिया कर वसूला ?

महाराणा राजसिंह

309.     किस स्थान पर राजसिंह ने द्वारिकाधाीश मंदिर का निर्माण कराया ?

कांकरोली

310.     मेवाड़ के किस शासक के समय वृंदावन से लाई गई श्रीनाथ जी की प्रतिमा सिहाड़ ग्राम (नाथद्वारा) में स्थापित की गई थी ?

राजसिंह प्रथम

311.     जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह की मृत्यु के पश्चात राजकुमार अजीत सिंह और दुर्गादास राठौड़ को मेवाड़ में शरण और केलवा की जागीर किसने प्रदान की थी ?

महाराणा राजसिंह

312.     राजसमंद झील का निर्माण किसने करवाया था ?

राज सिंह प्रथम

313.     विश्व की सबसे बड़ी संगमरमर पर उत्कीर्ण प्रशस्ति 'राज प्रशस्ति' के रचयिता कौन हैं ?

रणछोड़ भट्ट तेलंग

314.     राजसमंद प्रशस्ति कितने शिलालेखों पर लिखी गई है ?

25

315.     उदयपुर के अंबा माता मंदिर का निर्माण किसने और कब करवाया था ?

महाराणा राजसिंह ने 1664 ईस्वी में

316.     जयसमंद झील का अन्य नाम क्या है ?

ढेबर झील

317.     महाराणा जयसिंह ने औरंगज़ेब के किस विद्रोही पुत्र को मेवाड़ में शरण दी थी ?

शहज़ादा अकबर को

318.     महाराणा जयसिंह का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था ?

कुरज गांव में

319.     एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील 'जयसमंद झील' (ढेबर झील) का निर्माण किसने करवाया था ?

महाराणा जयसिंह ने

320.     जयसमंद झील राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?

उदयपुर जिलें में (वर्तमान में सलूम्बर में)

321.     सहेलियों की बाड़ी ( उदयपुर ) का निर्माण किसने करवाया ?

महाराणा संग्राम सिंह- II

322.     महाराणा अमर सिंह द्वितीय मेवाड़ की गद्दी पर किस वर्ष बैठे थे ?

1698 ई.

323.     देबारी समझौता कब हुआ था ?

1708 ईस्वी में

324.     देबारी समझौता कहाँ हुआ था ?

उदयपुर के पास देबारी नामक स्थान पर

325.     देबारी समझौता किन शासकों के मध्य हुआ था ?

मेवाड़ के महाराणा अमरसिंह द्वितीय, मारवाड़ के राजा अजीत सिंह और आमेर के राजा सवाई जयसिंह के बीच।

326.     मेवाड़ के प्रशासनिक ढांचे में“सोलह, बत्तीस, गोल सामंत”  किसने नियत किए थे ?

महाराणा अमर सिंह द्वितीय

327.     हुरडा सम्मेलन किस वर्ष आयोजित हुआ ?

1734 ई.

328.     17 जुलाई, 1734 ई. को 'हुरड़ा सम्मेलन' (भीलवाड़ा) की अध्यक्षता मेवाड़ के किस महाराणा ने की थी?

जगतसिंह द्वितीय

329.     17 जुलाई 1734 ईस्वी को हुरडा़ सम्मेलन किसके विरुद्ध बुलाया गया था ?

मराठों के

330.     उदयपुर की प्रसिद्ध पिछोला झील में स्थित 'जगत निवास महल' (जग निवास) का निर्माण किसने करवाया ?

महाराणा जगतसिंह द्वितीय ने।

331.     मेवाड़ रियासत में किस शासक के समय मराठों ने पहली बार प्रवेश कर (चौथकर ) वसूला था ?

महाराणा जगतसिंह द्वितीय के शासनकाल में

332.     मेवाड़ के प्रथम पॉलिटकल एजेंट कर्नल जेम्स टॉड की नियुक्ति किस शासक के शासनकाल में की गई ?

भीम सिंह

333.     1818 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी के साथ संधि के समय मेवाड़ के महाराणा कौन थे ?

भीमसिंह

334.     कृष्णा कुमारी की पहली सगाई किसके साथ हुई थी ?

मारवाड़ (जोधपुर) के महाराजा भीम सिंह के साथ

335.     कृष्णा कुमारी विवाद के कारण कौन सा युद्ध लड़ा गया था ?

गींगोली का युद्ध  (1807 ई.) में

336.     मेवाड़ की किस राजकुमारी को 1810 में अमीर खान पिंडारी की सलाह पर जहर दे दिया गया था ?

महाराणा भीमसिंह की पुत्री कृष्णा कुमारी

337.     गींगोली का युद्ध (या परबतसर का युद्ध)  कब व किनके बीच लड़ा गया था ?

1807 ई. में जयपुर और जोधपुर की सेनाओं के बीच

338.     मेवाड़, मारवाड़ व जयपुर राज्य का त्रिपक्षीय संघर्ष मेवाड़ के किस महाराणा के शासनकाल में प्रारम्भ हुआ

महाराणा भीमसिंह

339.     कृष्णा कुमारी किस राज्य की राजकुमारी थी जिसके विवाह के विवाद ने राजपूताना में राजनीतिक उथल-पुथल उत्पन्न कर दी

मेवाड़

340.     मेवाड़ की किस राजकुमारी को 1810 में अमीर खान पिण्डारी की सलाह पर ज़हर दे दिया गया ?

कृष्णा कुमारी

341.     महाराणा जवान सिंह कविताएँ लिखने के लिए किस उपनाम का प्रयोग करते थे ?

'ब्रजराज'

342.     मेवाड़ रियासत में 'डाकन प्रथा'  को गैर-कानूनी कब और किसके समय घोषित किया गया ?

अप्रैल 1853 ई. में, महाराणा स्वरूप सिंह के शासनकाल में

343.     मेवाड़ में 'सती प्रथा' पर कानूनी रोक लगाने वाले महाराणा कौन थे और उन्होंने यह रोक कब लगाई ?

महाराणा स्वरूप सिंह ने 15 अगस्त 1861 ई. में

344.     1857 ई. के स्वतंत्रता आंदोलन के समय मेवाड़ का शासक कौन था ?

महाराणा स्वरूप सिंह

345.     मेवाड़ रियासत में चांदी के 'स्वरूपशाही' सिक्के (जिस पर एक तरफ 'चित्रकूट उदयपुर' और दूसरी तरफ 'दोस्ती लंदन' लिखा था) किसने चलाए थे ?

महाराणा स्वरूप सिंह ने

346.     मेवाड़ के इतिहास में पति के साथ सती होने वाली अंतिम महिला कौन थीं ?

ऐजाबाई

347.     मेवाड़ के किस महाराणा के शासनकाल में मेवाड़ महाराणाओं के साथ सती होने की अंतिम घटना का विवरण मिलता है

स्वरूपसिंह

348.     1857 के विद्रोह के दौरान महाराणा स्वरूप सिंह ने नीमच छावनी से भागे ब्रिटिश अधिकारियों और उनके परिवारों को कहाँ शरण दी थी ?

जगमंदिर (पिचोला झील, उदयपुर)

 

349.     मेवाड़ के किस महाराणा के समय मेवाड़ भील कोर की स्थापना की गई थी?

सरदार सिंह

350.     महाराणा शंभू सिंह ने सैन्य व्यवस्था में सुधार के लिए किस नई पलटन का गठन किया था ?

'शंभू पलटन'

351.     मेवाड़ में 'महकमा खास' (सर्वोच्च प्रशासनिक न्यायालय) की स्थापना किस शासक ने और कब की थी ?

महाराणा शंभू सिंह ने 23 दिसंबर 1869 को

352.     मेवाड़ राज्य की पहली कन्या पाठशाला की स्थापना किसके शासनकाल में हुई ?

महाराणा शंभू सिंह के शासनकाल में उदयपुर में 'शंभूरत्न पाठशाला' नाम से

353.     मेवाड़ के पहले ऐसे शासक कौन थे जिनके निधन पर कोई भी रानी सती नहीं हुई ?

महाराणा शम्भू सिंह

354.     मेवाड़ के महाराणा शम्भू सिंह के दरबारी कवि कौन थे ?

कविराज श्यामल दास

355.     उदयपुर में स्थित 'सज्जनगढ़ पैलेस'/मानसून पैलेस जिसे 'मेवाड़ का मुकुटमणि' भी कहा जाता है, का निर्माण किसने करवाया था

महाराणा सज्जन सिंह ने

356.     उदयपुर में प्रसिद्ध 'सज्जन निवास गार्डन' (गुलाब बाग) और मानसून पैलेस (सज्जनगढ़ पैलेस) का निर्माण कार्य किस मेवाड़ शासक ने करवाया था?

महाराणा सज्जन सिंह ने

357.     मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहास ग्रंथ 'वीर विनोद' के लेखक कविराजा श्यामलदास किसके दरबारी कवि थे ?

महाराणा सज्जन सिंह के

358.     महाराणा सज्जन सिंह ने न्यायिक और प्रशासनिक सुधारों के लिए 1877 ई. में किस संस्था की स्थापना की थी ?

'इजलास खास' (इसके बाद 1880 में 'महेन्द्राज सभा' का गठन किया गया)।

359.     राजपूताना में स्वामी दयानन्द सरस्वती के आगमन के समय मेवाड़ के शासक कौन थे ?

महाराणा सज्जनसिंह

360.     महाराणा सज्जन सिंह को किस गवर्नर जनरल ने ‘ग्रैंड कमांडर ऑफ द स्टार ऑफ़ इंडिया’ की उपाधि दी थी ?

लॉर्ड रिपन

361.     मेवाड़ के महाराणा फतेहसिंह का शासनकाल कब से कब तक रहा था ?

1884–1930 ई.

362.     महाराणा फतेह सिंह ने 1889 में किसके के दौरे के उपलक्ष्य में देवली झील पर कनॉट बांध का निर्माण कराया था ?डयूक ऑफ कनॉट

363.     इतिहास के एकमात्र ऐसे शासक कौन थे जिन्होंने 1903 और 1911 दोनों दिल्ली दरबारों का बहिष्कार किया था ?

महाराणा फतेहसिंह

364.     मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह को व्यंग्य “चेतावनी रा चुंगट्या” किसने भेजा, जो दिल्ली दरबार में शामिल होने जा रहे थे, परंतु व्यंग्य को पढ़ने के बाद शामिल नहीं हए

केसरी सिंह बारहठ

365.     उस महाराणा का क्या नाम था जो केसरीसिंह बारहठ की “चेतावनी रा चुंगटिया” से इस कदर प्रभावित हो गए थे कि उन्होंने दिल्ली दरबार के लिए अपनी यात्रा रद्द कर दी –

महाराणा फतहसिंह

366.   चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित 'फतेह प्रकाश महल' का निर्माण किसने करवाया था?

महाराणा फतेह सिंह

367.   वर्ष 1903 में दिल्ली में आयोजित शाही दरंबार में भाग नहीं लेने वाला राजपूताना का राज्य था

मेवाड़

368.   मेवाड़ के मेवाड़ रियासत के अंतिम शासक कौन थे ?

महाराणा भूपालसिंह

369.   राजस्थान के एकीकरण के समय मेवाड़ (उदयपुर) के शासक कौन थे ?

महाराणा भूपाल सिंह

370.   30 मार्च 1949 को 'बृहत् राजस्थान' के गठन के समय राजस्थान के एकमात्र 'महाराजप्रमुख' किसे नियुक्त किया गया था ?

महाराणा भूपाल सिंह को।

371.   18 अप्रैल 1948 को गठित 'संयुक्त राजस्थान' (तीसरे चरण) के राजप्रमुख कौन बने थे?

महाराणा भूपाल सिंह।

372.   महाराणा भूपाल सिंह किसके उत्तराधिकारी बने थे और उन्होंने गद्दी कब संभाली?

पिता महाराणा फतेह सिंह के बाद 25 मई 1930 को

373.   भारत की आजादी तथा राजस्थान के एकीकरण के समय मेवाड़ के महाराणा थे ?

महाराणा भूपालसिंह